यूक्रेन युद्ध: ड्रोन अब माइक्रोफोन से खोज रहे हैं सैनिकों को
रूसी और यूक्रेनी सेनाएं घात लगाने वाले ड्रोन और ग्राउंड रोबोट में सस्ते माइक्रोफोन लगा रही हैं, ताकि कैमरे की पहुंच से बाहर दुश्मन का पता चल सके।

रूस और यूक्रेन की सेनाएं घात लगाने वाले अटैक ड्रोन और ग्राउंड रोबोट में माइक्रोफोन लगा रही हैं। इसका मकसद उन दुश्मनों का पता लगाना है, जो कैमरे की पहुंच से बाहर हैं। इस बदलाव में सस्ते इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे ही लगते हैं, लेकिन इससे मशीनें इंजन, बातचीत और आसपास की हलचल सुन सकती हैं। यानी किसी को देखे बिना भी यह भांपा जा सकता है कि वह पास आ रहा है।
घात लगाने वाले ड्रोन
इस तकनीक की जड़ें Zhdun (यानी «वेटर») नाम के FPV ड्रोन में हैं, जिनका इस्तेमाल 2024 के अंत से शुरू हुआ। ये ड्रोन उड़ते रहने में बैटरी खर्च नहीं करते। वे सड़कों के किनारे उतरकर इंजन बंद कर देते हैं और घंटों, यहां तक कि पूरी रात इंतजार करते हैं। लक्ष्य दिखते ही वे उड़ान भरकर कम दूरी से हमला करते हैं। उनकी कमजोरी यह थी कि रास्ते पर नजर रखनी पड़ती थी, जिससे दूसरे ड्रोन उन्हें पहचानकर नष्ट कर सकते थे।
यूक्रेनी विशेषज्ञ सेरही बेस्क्रेस्तनोव ने 14 अगस्त को चेताया कि रूस माइक्रोफोन वाले घात ड्रोन इस्तेमाल कर रहा है। 11 सितंबर को रूसी निर्माता Ushkuynik ने अपने ऑप्टिकल-फाइबर FPV ड्रोन Prince Vandal Novgorod (KVN) में यह तकनीक जोड़ने की पुष्टि की। विश्लेषकों के आंकड़ों के मुताबिक KVN का उत्पादन हर महीने करीब 50,000 यूनिट है।
यूक्रेन ने कुछ हफ्तों में जवाब दिया। 17 अक्टूबर को कंपनी Ptashka ने बताया कि उसके फाइबर-ऑप्टिक FPV ड्रोन में माइक्रोफोन लग चुके हैं। कंपनी के मुताबिक वे तेज आवाज में बातचीत 20-30 मीटर, हल्के वाहन 50-100 मीटर और भारी मशीनरी 200 मीटर तक पकड़ सकते हैं। ये कंपनी के दावे हैं और इलाके व शोर पर निर्भर करते हैं। उसका Multi-Zhdun सिस्टम एक ऑपरेटर को कई ड्रोन संभालने देता है।
रोबोट भी सुन और बोल रहे हैं
यूक्रेन के ग्राउंड रोबोट गोला-बारूद ढोने, घायलों को निकालने, बारूदी सुरंग बिछाने और हमले में काम आते हैं। DevDroid जैसी कंपनियां इनमें माइक्रोफोन लगा रही हैं, जो आवाज ऑपरेटर तक भेजते हैं। DevDroid अब स्पीकर भी जोड़ रही है, जिनसे रिकॉर्डेड संदेश या ऑपरेटर की आवाज सुनाई जा सकती है। इनसे रूसी सैनिकों से आत्मसमर्पण की अपील, फंसे यूक्रेनी सैनिकों से संपर्क और घायलों से बातचीत संभव है।
आगे क्या
अगला कदम कई ड्रोन के सिग्नल को Delta जैसे सैन्य सूचना प्लेटफॉर्म से जोड़ना हो सकता है, ताकि गोलीबारी और इंजन की जगह का अनुमान लगे। फिलहाल यह तकनीकी संभावना है, सिद्ध क्षमता नहीं। एक अकेला माइक्रोफोन हमेशा सटीक स्थान नहीं बता पाता, और हवा या धमाकों का शोर बाधा बनता है। फिर भी इसका संकेत साफ है: कैमरे से बचना अब पर्याप्त नहीं, क्योंकि चालू इंजन, बातचीत या गोली की आवाज भी छिपी हलचल उजागर कर सकती है।
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