पोलैंड के रोबोट ने 30 दिन में खोजीं चार नई रासायनिक अभिक्रियाएं
पोलिश एकेडमी ऑफ साइंसेज के रोबोट ने 30 दिन तक प्रयोग किए, 3,000 से ज्यादा फैसले लिए और चार नई रासायनिक अभिक्रियाएं खोजने में मदद की।

वारसॉ स्थित पोलिश एकेडमी ऑफ साइंसेज (PAN) के कार्बनिक रसायन संस्थान के एक रोबोट ने 30 दिन तक प्रयोग किए, नतीजों का विश्लेषण किया और अगला कदम खुद तय किया। इस दौरान उसने 3,000 से ज्यादा फैसले लिए और चार ऐसी रासायनिक अभिक्रियाओं की खोज में मदद की, जिनका पहले वर्णन नहीं था। वैज्ञानिकों को हर प्रयोग में यह बताने की जरूरत नहीं पड़ी कि कौन-सी परिस्थितियां जांचनी हैं।
इस उपकरण को डॉ. यारोस्वाव एम. ग्रांडा की अगुवाई वाली टीम ने बनाया है। शोध Nature Communications में प्रकाशित हुआ है। ध्यान रहे कि 3,000 का आंकड़ा प्रयोगों की संख्या नहीं, बल्कि सॉफ्टवेयर के फैसलों की संख्या है, जैसे किसी खास परिस्थिति की आगे जांच करना या नहीं। खोज का मतलब नए तत्व या अज्ञात पदार्थ नहीं, बल्कि रासायनिक परिवर्तन करने के नए तरीके हैं। कुल 100 चुनी गई अभिक्रियाओं के विश्लेषण से चार नए परिवर्तन मिले, जिनमें उच्च enantioselectivity है।
कैसे काम करता है रोबोट
सिस्टम में तीन अक्षों पर चलने वाला तरल-हैंडलिंग रोबोट है। सिरिंज पंप से जुड़ी एक विशेष सुई पहले से तैयार घोल लेकर उन्हें शीशियों में डालती है, जिनके होल्डर 3D प्रिंटिंग से बने हैं। अभिक्रियाएं -40 से लगभग 90 डिग्री सेल्सियस तक की जा सकती हैं, और बाद में मिश्रण का क्रोमैटोग्राफी से विश्लेषण होता है। दो विश्लेषण मॉड्यूल रोज 40 से 50 मिश्रण जांच सकते थे, और उपकरण रात व सप्ताहांत में भी चल सकता था।
फैसले डीप रिइन्फोर्समेंट लर्निंग एल्गोरिद्म लेता है, जो अपने कदमों के नतीजों से सीखता है। असली रोबोट पर लगाने से पहले दो आभासी वातावरण बनाए गए: पहले AI एजेंट ने 20 मिलियन और दूसरे ने 10 मिलियन प्रशिक्षण इंटरैक्शन पूरे किए। इसके बाद रोबोट तय कर सका कि अभिक्रिया कितनी देर चले, तापमान क्या हो और कोई दिशा आगे बढ़ाने लायक है या नहीं।
दवाओं के लिए अहमियत और सीमाएं
शोध असममित ऑर्गेनोकैटेलिसिस पर केंद्रित था, जिसमें कुछ अणु एक-दूसरे के दर्पण प्रतिबिंब जैसे दो रूपों में मिलते हैं, जैसे बायां और दायां हाथ। शरीर में ये अलग तरह से काम कर सकते हैं, इसलिए दवा बनाते समय इनका नियंत्रण अहम है। चार में से एक अभिक्रिया अक्षीय काइरैलिटी वाला यौगिक देती है, जबकि तीन एलीन के संश्लेषण की अनुमति देती हैं। एक नतीजा पायरोलोपायरोल नामक अणु-खंड के पहले enantioselective functionalization से जुड़ा है।
लेखकों के अनुसार रोबोट पूरी तरह स्वतंत्र शोध नहीं करता। खोज का क्षेत्र, अभिकारक, उपकरण और विश्लेषण पद्धति इंसानों ने तय की, और खोजे गए उत्पादों की अतिरिक्त जांच भी जरूरी थी। यह भी अभी पता नहीं कि रोबोट बिल्कुल अलग प्रक्रियाओं में उतना ही कारगर होगा या नहीं, और इन अभिक्रियाओं से फिलहाल नई दवाएं बनने का दावा नहीं किया जा सकता। फिर भी रसायनज्ञ दोहराए जाने वाले प्रयोग और आगे क्या जांचना है, इसके कुछ फैसले मशीन को सौंप सकते हैं।
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