Osegi
विज्ञान·2 मिनट में पढ़ें

जर्मन वैज्ञानिकों ने ग्राफीन में इलेक्ट्रॉनों की गति कैमरे में उतारी

रेगेन्सबर्ग और मारबुर्ग के शोधकर्ताओं ने प्रकाश तरंग के एक ही चक्र में ग्राफीन के इलेक्ट्रॉनों की गति दर्ज की और LZM टनलिंग को सीधे देखा।

Illustration of an ultrashort light pulse striking a honeycomb graphene lattice with glowing electrons in motion.
छवि: CHIP Polska - Technologie mamy we krwi!

जर्मनी के रेगेन्सबर्ग विश्वविद्यालय और मारबुर्ग के फिलिप्स विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने ग्राफीन में इलेक्ट्रॉनों की गति को पहली बार इतने बारीक स्तर पर दर्ज किया है। टीम प्रकाश तरंग के केवल एक चक्र के भीतर होने वाले बदलावों को देखने में सफल रही। शोध के नतीजे Nature पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं।

प्रयोग कैसे किया गया

ग्राफीन कार्बन परमाणुओं की एक परत वाला पदार्थ है, जिसकी संरचना मधुमक्खी के छत्ते जैसी होती है। कुछ परिस्थितियों में इसके इलेक्ट्रॉन ऐसे व्यवहार करते हैं मानो वे सापेक्षतावादी कण हों। इसी कारण यह क्वांटम घटनाओं के अध्ययन के लिए उपयुक्त माध्यम माना जाता है।

शोधकर्ताओं ने 30 THz आवृत्ति के तीव्र अवरक्त (इन्फ्रारेड) प्रकाश पल्स से इलेक्ट्रॉनों को नियंत्रित गति दी। फिर अत्यंत छोटे एक्सट्रीम अल्ट्रावायलेट पल्स से उनका व्यवहार दर्ज किया। इससे इलेक्ट्रॉनिक संरचना में होते बदलावों की एक के बाद एक तस्वीरें मिलीं। टीम के अनुसार इस तरीके से न सिर्फ इलेक्ट्रॉनों की गति, बल्कि उनके ऊर्जा वितरण और संवेग में बदलाव भी देखे जा सकते हैं।

क्या दिखा

सबसे अहम उपलब्धि लांडाउ-जेनर-मायोराना (LZM) टनलिंग की सीधी इमेजिंग है। इस क्वांटम घटना में तीव्र विद्युत क्षेत्र के असर से इलेक्ट्रॉन एक ऊर्जा बैंड से दूसरे में चले जाते हैं। प्रयोग में इलेक्ट्रॉनों का वितरण पहले एक दिशा में खिसका, फिर विकृत होकर लंबा, अंडाकार आकार ले गया। बाद में प्रकीर्णन के प्रभाव भी दिखाई दिए।

विधि से पूरे पहले ब्रिलुआँ ज़ोन में इलेक्ट्रॉनों की गतिशीलता देखी जा सकती है। पहले की तुलना में अवलोकन का दायरा सौ गुना से अधिक बढ़ा है।

आगे क्या

प्रकाश इलेक्ट्रॉनों की गति को कैसे प्रभावित करता है, इसकी बेहतर समझ नए इलेक्ट्रॉनिक और ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के डिज़ाइन में मदद कर सकती है। सबसे आशाजनक दिशाओं में से एक लाइटवेव इलेक्ट्रॉनिक्स है, जिसमें आकार दिए गए प्रकाश पल्स से इलेक्ट्रॉनिक संकेत नियंत्रित किए जाएंगे। भविष्य में इससे पारंपरिक तकनीक से कहीं अधिक गति वाले सर्किट बन सकते हैं।

टैग:graphenequantum physicselectron dynamicslightwave electronicsnature

इसी दिन की और ख़बरें

सभी देखें →

और पढ़ें:: विज्ञान

सभी देखें →