फ्लोरिडा कीज़ में 'पानी के नीचे छतरी' से घटा कोरल ब्लीचिंग
शोधकर्ताओं ने रिकॉर्ड गर्मी में कैरिबियन के कोरल पर कपड़े की छोटी छाया लगाई। ढके कोरल में ब्लीचिंग कम रही और कुछ का रंग लौटने लगा।

वैज्ञानिकों ने कोरल को ब्लीचिंग से बचाने के लिए एक बेहद सरल उपाय आज़माया है: पानी के नीचे छतरी जैसी छाया। जर्नल Frontiers in Marine Science में छपे अध्ययन के मुताबिक, छाया में रखे कैरिबियन कोरल में ब्लीचिंग कम हुई और कुछ कोरल ने अपना रंग वापस पाना शुरू कर दिया।
कैसे हुआ परीक्षण
शोध टीम ने 2024 की गर्मियों में फ्लोरिडा कीज़ के न्यूफाउंड हार्बर में प्रयोग किया। पाइप और नायलॉन कपड़े से बने 20 शेड लगाए गए, जो कोरल से करीब 30 सेंटीमीटर ऊपर तैरते हैं। ये दो प्रजातियों (Pseudodiploria clivosa और Colpophyllia natans) के कुल 10 कोरल कॉलोनियों को ढकते थे। तुलना के लिए 20 कॉलोनियों को बिना छाया के रखा गया। शेड से कोरल पर पड़ने वाली धूप 60 प्रतिशत घट गई।
हर दो हफ्ते में गोताखोर रंग में बदलाव देखते और ऊतक के नमूने लेते थे। उस गर्मी में वहाँ दर्ज हुआ हीट स्ट्रेस अब तक का दूसरा सबसे ऊँचा था, फिर भी ढके कोरल में ब्लीचिंग उम्मीद से हल्की रही। अंतर सबसे साफ़ तब दिखा जब गर्मी का दबाव चरम पर था।
सीमाएँ और आगे की राह
बिना छाया वाले कोरल भी अपेक्षा से कम ब्लीच हुए, और किसी समूह में कोरल की मौत दर्ज नहीं हुई। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि समुद्री हीटवेव के कारण ज़्यादातर कोरल में गर्मी सहने वाली शैवाल Durusdinium हावी हो गई, जो कोरल की वृद्धि धीमी कर सकती है और बीमारी का खतरा बढ़ा सकती है। शैवाल की मात्रा या प्रकार में दोनों समूहों के बीच फर्क नहीं मिला, संभवतः इसलिए कि अनुमति की शर्तों के कारण नमूने सिर्फ कोरल के किनारों से लिए जा सके। टीम का मानना है कि पानी के ज़्यादा गर्म होने से पहले शेड लगाए जाते तो असर और बेहतर हो सकता था।
प्रमुख लेखिका और नोवा साउथईस्टर्न यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता करेन नीली के अनुसार, यह ढाँचा चुनिंदा कोरल, कोरल नर्सरी और छोटे प्रत्यारोपण क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है, पर नए इंजीनियरिंग विचारों से बड़े रीफ़ तक भी पहुँचा जा सकता है। उन्होंने बताया कि बड़े पैमाने के परीक्षण इस गर्मी में शुरू हो चुके हैं। टीम अब लंबी अवधि के असर देखना चाहती है, जैसे बीमारी में कमी और प्रजनन दर में बढ़ोतरी, जिन्हें अभी परखा जाना बाकी है।
अनुमान है कि 2050 तक लगभग सभी कोरल रीफ़ हर साल बड़े पैमाने की ब्लीचिंग झेलेंगे। ऐसे में यह उपाय जलवायु कार्रवाई का विकल्प नहीं, बल्कि कुछ कोरल को बचाने का अस्थायी सहारा है।
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