Orion के साथ चंद्रमा का चक्कर लगाने वाले पोलिश क्रिस्टल ने पकड़ा विकिरण
क्राकोव में बने लिथियम फ्लोराइड क्रिस्टल Artemis I में चंद्रमा के पास गए और ऐसे विकिरण निशान दर्ज किए, जो सामान्य प्लास्टिक डिटेक्टर नहीं पकड़ पाते।

क्राकोव में विकसित छोटे क्रिस्टल Orion यान पर सवार होकर चंद्रमा का चक्कर लगा आए और कॉस्मिक विकिरण के निशान लेकर पृथ्वी लौटे। अब पोलिश वैज्ञानिकों ने इनके विश्लेषण के नतीजे पेश किए हैं। नतीजों के मुताबिक ये डिटेक्टर ऐसे संकेत पकड़ लेते हैं, जिन्हें पारंपरिक डिटेक्टर दर्ज नहीं करते।
Artemis I और MARE प्रयोग
नवंबर 2022 में NASA ने बिना चालक दल वाला Artemis I मिशन भेजा। Orion ने चंद्रमा का चक्कर लगाया और 25 दिन से ज़्यादा बाद लौटा। यान में Helga और Zohar नाम के दो फैंटम थे, यानी मानव शरीर के ऊतकों जैसे पदार्थ से बने मॉडल। उनके भीतर 10 हज़ार से ज़्यादा विकिरण डिटेक्टर लगे थे।
MARE प्रयोग में पोलिश विज्ञान अकादमी का परमाणु भौतिकी संस्थान (क्राकोव) भी शामिल था। उसने लगभग 600 थर्मोल्यूमिनेसेंट डिटेक्टर और दर्जनों प्रायोगिक फ्लोरेसेंट सेंसर दिए, जो लिथियम फ्लोराइड क्रिस्टल से बने थे। प्रो. पावेल बिल्स्की की टीम ने जर्मनी के DLR के साथ मिलकर इनसे अलग-अलग ऊर्जा वाले विकिरण की जानकारी पढ़ने की विधि बनाई। शोध Radiation Measurements पत्रिका में छपा है।
क्रिस्टल कैसे काम करते हैं
ये निष्क्रिय डिटेक्टर हैं और इन्हें बिजली या कंप्यूटर नहीं चाहिए। आवेशित कण क्रिस्टल से गुज़रता है तो उसकी परमाणु संरचना में “कलर सेंटर” नाम के दोष बन जाते हैं। प्रयोगशाला में नीली रोशनी डालने पर ये लाल फ्लोरेसेंस देते हैं, जो विशेष माइक्रोस्कोप से दिखती है। हर क्रिस्टल करीब 3 मिमी लंबा-चौड़ा और 1 मिमी मोटा था। प्लास्टिक डिटेक्टरों की तरह इन्हें रासायनिक एचिंग की ज़रूरत नहीं पड़ती।
तुलना में प्लास्टिक डिटेक्टर आम तौर पर लगभग 10 keV प्रति माइक्रोमीटर (पानी के समतुल्य) से ऊपर के LET वाले कण दर्ज करते हैं, जबकि क्रिस्टल करीब 4,5 keV प्रति माइक्रोमीटर पर भी निशान दिखा देते हैं। फिर भी सबसे हल्के निशानों को सटीक खुराक में बदलने की विधियाँ अभी विकसित हो रही हैं। कुछ दायरे में डिटेक्टरों ने पारंपरिक सेंसरों से ज़्यादा मान भी दिखाए, खासकर बहुत अधिक ऊर्जा देने वाले कणों के लिए।
चंद्रमा के पास विकिरण
मापों के अनुसार चंद्रमा के क्षेत्र में कुल खुराक निचली पृथ्वी कक्षा से ज़्यादा है, पर अंतर अपेक्षा जितना बड़ा नहीं। फैंटमों के अंदर खुराक अपेक्षाकृत समान रूप से फैली थी, क्योंकि गैलेक्टिक विकिरण पूरे शरीर को भेद सकता है। फिर भी लंबी अवधि का एक्सपोज़र और सौर गतिविधि की घटनाएँ भविष्य के चालक दल वाले मिशनों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
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