आलू के छिलकों से सोलर सेल बना रहे हैं पोलैंड के वैज्ञानिक
लॉड्ज़ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिक आलू के छिलकों से ग्राफीन क्वांटम डॉट्स बना रहे हैं, ताकि ऑर्गेनिक फोटोवोल्टाइक तैयार हो सके।

पोलैंड की लॉड्ज़ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के इंस्टीट्यूट ऑफ मटीरियल्स इंजीनियरिंग के शोधकर्ता जैविक कचरे से सौर ऊर्जा तकनीक विकसित करने पर काम कर रहे हैं। इस काम में आलू के छिलकों का इस्तेमाल हो रहा है।
प्रोजेक्ट की अगुवाई डॉ. इंज. पियोत्र ज़ावाद्ज़्की की टीम कर रही है। उनका विचार सीधा है: जीवन कार्बन पर आधारित है, और ज़्यादा जला हुआ आलू वास्तव में कार्बन में बदल जाता है। इस कार्बन से ग्राफीन क्वांटम डॉट्स बनाए जा सकते हैं।
सिलिकॉन पैनलों से तुलना
अपने ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक गुणों के कारण ये क्वांटम डॉट्स सौर ऊर्जा को बिजली में बदल सकते हैं, यानी सिद्धांत रूप में वे सिलिकॉन फोटोवोल्टाइक पैनलों जैसा ही काम करते हैं। फिलहाल उनकी दो कमज़ोरियाँ हैं: दक्षता सिलिकॉन पैनलों से 3-4 गुना कम है और टिकाऊपन भी कम है।
दूसरी ओर, इन्हें बनाने के लिए पूरे आलू की भी ज़रूरत नहीं, केवल छिलके काफ़ी हैं, जो वैसे भी कचरे में चले जाते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक़ दक्षता के साथ सतह का क्षेत्रफल भी मायने रखता है।
आगे की योजना
वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि समय के साथ वे अपने ग्राफीन क्वांटम डॉट्स पर आधारित फोटोवोल्टाइक पेंट तैयार कर सकेंगे। इसके अलावा, पारंपरिक सौर पैनलों के साथ जोड़ने पर उनकी दक्षता बढ़ाई जा सकती है। इन डॉट्स में एंटीबैक्टीरियल और एंटीस्टैटिक गुण भी हैं।
अभी यह तकनीक शोध के चरण में है। अगर प्रोजेक्ट व्यावहारिक रूप से उपयोगी तकनीक में बदलता है, तो खाद्य कचरा सस्ते और टिकाऊ सौर पदार्थों का स्रोत बन सकता है।
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