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Beta Pictoris की 'कैट्स टेल' प्लूटो जितने बड़े पिंडों की टक्कर का नतीजा

Hubble और James Webb के नए डेटा के मुताबिक Beta Pictoris के धूल-डिस्क में दिखी 'कैट्स टेल' दो प्लूटो-आकार के पिंडों की टक्कर से बनी हो सकती है।

Infrared image of the dusty disk around Beta Pictoris with a faint tail-shaped dust plume extending outward.
छवि: Numerama

खगोलविदों के अनुसार Beta Pictoris के धूल-डिस्क में दिखने वाली रहस्यमयी संरचना 'कैट्स टेल' (बिल्ली की पूँछ) संभवतः दो खगोलीय पिंडों की भीषण टक्कर से बनी है। ये पिंड प्लूटो के आकार के हो सकते हैं। यह निष्कर्ष The Astrophysical Journal Letters में छपे अध्ययन का है, जो Hubble और James Webb के अवलोकनों पर आधारित है।

क्या मिला

यह संरचना दक्षिणी गोलार्ध से दिखने वाले तारामंडल पिक्टर (Pictor) में है और डिस्क से बाहर निकलती दिखती है। 2024 की शुरुआत में James Webb ने अभूतपूर्व स्पष्टता के साथ इसे पकड़ा था। Beta Pictoris पृथ्वी से 63 प्रकाश-वर्ष दूर एक युवा तारा है, जिसका ग्रह-मंडल कुछ ही करोड़ नहीं, बल्कि कुछ लाख वर्षों से बन रहा है। यह किसी तारे के चारों ओर सबसे पहले तस्वीर में कैद हुआ डिस्क भी है: 1983 में IRAS उपग्रह ने इसे पहचाना और 1984 में चिली की Las Campanas वेधशाला से इसकी पहली तस्वीर ली गई।

नए अध्ययन में Isabel Rebollido (मैड्रिड स्थित खगोल-जीवविज्ञान केंद्र) और Christopher Stark (NASA का Goddard Space Flight Center) जैसे 2024 के शोध के कुछ लेखक भी शामिल हैं। टीम ने Hubble की नई तस्वीरों को 14 साल पुराने अवलोकनों के साथ जोड़कर संरचना की सटीक स्थिति और प्रकृति परखी।

धूल की प्रकृति

नतीजों के अनुसार टक्कर की परिकल्पना सही निकली। टक्कर से निकली धूल लगभग पूरी तरह कार्बन-समृद्ध कार्बनिक पदार्थ की है, जो दृश्य प्रकाश को सोख लेती है। इसलिए यह बेहद गहरे रंग की है और अब तक केवल James Webb की इन्फ्रारेड नज़र ही इसे पकड़ पाई थी। अब Hubble ने इसे दृश्य प्रकाश में भी देखा है।

धूल के कण करीब एक माइक्रोन (मिलीमीटर का हज़ारवाँ हिस्सा) के और बहुत छिद्रयुक्त हैं। पूरी संरचना लगभग 1,000 खगोलीय इकाइयों, यानी करीब 150 अरब किलोमीटर तक फैली हो सकती है। अध्ययन के साथ जारी बयान के अनुसार यह लगभग 200 लाख करोड़ बिल्लियों को एक सिरे से दूसरे सिरे तक जोड़ने जितनी लंबाई है। Arizona विश्वविद्यालय की Steward Observatory के सह-लेखक Kevin Wagner के मुताबिक टक्कर की गति इतनी अधिक रही होगी कि कार्बन कण वाष्पित हो गए और ठंडा होते समय फिर जमकर छिद्रयुक्त बने।

शोधकर्ताओं का कहना है कि ऐसे युवा तंत्र का अध्ययन हमारे सौरमंडल को समझने में मदद करता है, क्योंकि पृथ्वी और अन्य ग्रहों के अंतिम रूप लेने से पहले यहाँ भी ऐसी टक्करें हुई होंगी।

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