टोक्यो विश्वविद्यालय का एंजाइम वाला प्लास्टिक समुद्र तल में 30 गुना तेज़ गला
टोक्यो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एंजाइम वाला बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक बनाया है, जो समुद्र तल में पांच महीने में पूरी तरह गल गया।

टोक्यो विश्वविद्यालय और अन्य संस्थानों के शोधकर्ताओं ने ऐसा बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक विकसित किया है, जिसमें पहले से एंजाइम मौजूद हैं। ये एंजाइम समुद्री वातावरण में प्लास्टिक के टूटने की प्रक्रिया को तेज़ कर देते हैं। इससे समुद्र तल में जमा होने वाले कचरे को घटाने की उम्मीद जगी है।
पांच महीने में पूरी तरह गायब
टीम के अनुसार, यह सामग्री उस प्लास्टिक कचरे की समस्या से निपटने के लिए बनाई गई है, जो धीरे-धीरे गलता है और अंततः समुद्रों में पहुंचकर महासागर की तलहटी में जमा होता रहता है। नई सामग्री में एंजाइम पहले से मिले होते हैं और जैसे ही प्लास्टिक की सतह पानी के संपर्क में आती है, वे उसे तोड़ना शुरू कर देते हैं।
व्यावहारिक प्रयोग में वैज्ञानिकों ने पुष्टि की कि जापान के कानागावा तट के पास, टोक्यो के नज़दीक, 750 मीटर से अधिक गहराई पर समुद्र तल में रखा गया यह प्लास्टिक पांच महीने में पूरी तरह गल गया। शोधकर्ताओं के मुताबिक यह एक अन्य बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक की तुलना में 30 गुना तेज़ी से गला, जिसमें गलन बढ़ाने वाले एंजाइम नहीं थे।
सूक्ष्मजीवों पर निर्भरता नहीं
टीम का कहना है कि एंजाइम अंदर ही मौजूद होने के कारण यह सामग्री समुद्र तल में किसी खास प्रकार के सूक्ष्मजीवों की मौजूदगी पर निर्भर हुए बिना तेज़ी से विघटित हो सकती है।
टोक्यो विश्वविद्यालय के कृषि एवं जीवन विज्ञान स्नातक विद्यालय के प्रोफेसर इवाता तादाहिसा ने कहा कि जब यह प्लास्टिक समुद्र तल जैसे कठोर वातावरण में भी एंजाइमों की मदद से गल जाता है, तो नतीजों का लाभ पहाड़ों और नदियों जैसे अन्य परिवेशों में भी लिया जा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन निष्कर्षों को व्यावहारिक उपयोग में बदला जाएगा, ताकि इस पर्यावरणीय समस्या को कम करने में मदद मिल सके।
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