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Mischief 1: जीवित न्यूरॉन्स पर आधारित नया वीडियो AI मॉडल लॉन्च

The Biological Computing Co. ने Mischief 1 लॉन्च किया है। कंपनी के मुताबिक यह असली न्यूरॉन्स के शोध से बना है और 5 सेकंड की 720p क्लिप 5 सेंट में बनाता है।

Neurons growing on an electrode grid in a lab, alongside a generated video frame from an AI video model.
छवि: Numerama

The Biological Computing Co. (TBC) ने Mischief 1 नाम का नया इमेज-टू-वीडियो मॉडल पेश किया है। कंपनी का दावा है कि यह असली न्यूरॉन्स के अध्ययन से मिली सीख पर आधारित है। यह एक इमेज और टेक्स्ट विवरण से 3 से 5 सेकंड की वीडियो क्लिप बनाता है।

कीमत और क्षमता

Mischief 1 fal.ai प्लेटफ़ॉर्म पर API के जरिए उपलब्ध है। 480p वीडियो के लिए कीमत 0.5 सेंट प्रति सेकंड और 720p के लिए 1 सेंट प्रति सेकंड है। यानी 5 सेकंड की 720p क्लिप करीब 5 सेंट में बनती है। TBC इसे अपनी श्रेणी का सबसे सस्ता मॉडल बताती है। लॉन्च 30 अक्टूबर 2026 को हैलोवीन से ठीक पहले हुआ, इसी वजह से नाम में "mischief" है।

यह मॉडल शुरू से नहीं बना है। यह Alibaba के ओपन सोर्स मॉडल Wan 2.2 पर टिका है। TBC उसमें एक छोटी सॉफ़्टवेयर परत जोड़ती है, जो मूल मॉडल के 0.1% से भी कम है। कंपनी के अनुसार नतीजा बराबर गुणवत्ता, कम से कम 5 गुना तेज़ जनरेशन और 80% कम कंप्यूट लागत है। उसके पेज पर 12 सेकंड बनाम Wan 2.2 के 142 सेकंड का आँकड़ा दिया गया है।

न्यूरॉन्स का दावा

TBC की स्थापना न्यूरोसर्जन Alex Ksendzovsky और Jon Pomeraniec ने की है। सैन फ्रांसिस्को और बाल्टीमोर की लैब में चूहों के और मानव स्टेम सेल से बने न्यूरॉन्स इलेक्ट्रोड ग्रिड पर उगाए जाते हैं। टीम किसी समस्या को विद्युत उत्तेजना में बदलती है, न्यूरॉन्स की प्रतिक्रिया दर्ज करती है और उसमें दोहराए जाने वाले गणनात्मक पैटर्न खोजती है। इन्हें समीकरणों में बदलकर सामान्य कृत्रिम नेटवर्क में जोड़ा जाता है। Mischief 1 चलाने में किसी चूहे के न्यूरॉन का इस्तेमाल नहीं होता; यह सामान्य GPU पर चलता है।

इस क्षेत्र में TBC अकेली नहीं है। ऑस्ट्रेलिया की Cortical Labs मानव न्यूरॉन्स वाला "जैविक कंप्यूटर" बेचती है और स्विट्ज़रलैंड की FinalSpark अपने ब्रेन ऑर्गेनॉइड्स का एक्सेस किराये पर देती है। पर TBC पहली है जिसने ऐसे शोध को आम उपयोगकर्ताओं के लिए व्यावसायिक उत्पाद बनाया।

फिलहाल कोई वैज्ञानिक प्रकाशन नहीं है जो विधि का ब्योरा दे। इसलिए यह सत्यापित करना मुश्किल है कि यह न्यूरॉन-आधारित तरीका Wan 2.2 को पहले से ज्ञात तकनीकों से बेहतर तेज़ करता है या नहीं।

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