Google DeepMind के कर्मचारी आजीवन आलोचना-प्रतिबंध क्लॉज़ के खिलाफ
Google DeepMind के कर्मचारी चाहते हैं कि कंपनी की आलोचना रोकने वाला क्लॉज़ सिर्फ नए नहीं, मौजूदा अनुबंधों से भी हटे। ब्रिटेन के कुछ कॉन्ट्रैक्ट में इसकी कोई समय-सीमा नहीं थी।

Google DeepMind के भीतर non-disparagement क्लॉज़ को लेकर विवाद बढ़ रहा है। ये ऐसे प्रावधान हैं जो कर्मचारियों को नियोक्ता की सार्वजनिक आलोचना करने से रोकते हैं। ब्रिटेन में काम करने वाले कुछ कर्मचारियों के मामले में स्थिति खास तौर पर गंभीर बताई गई है।
The Washington Post ने जिस अनुबंध को देखा, उसके अनुसार यह बाध्यता कंपनी छोड़ने के बाद भी लागू रहती थी और इसकी कोई समाप्ति-तिथि नहीं थी। यानी व्यवहार में यह आजीवन थी।
DeepMind के दो मौजूदा कर्मचारियों ने अखबार से कहा कि ऐसे प्रावधानों के कारण AI के विकास के संभावित नतीजों के बारे में जनता को जानकारी देना मुश्किल हो जाता है। कंपनी की कार्रवाई के डर से दोनों ने नाम जाहिर नहीं किया। एक कर्मचारी के मुताबिक हाल ही में दर्जनों लोगों ने आंतरिक संचार प्लेटफ़ॉर्म पर इस पर चर्चा की। कुछ ने क्लॉज़ की खुली आलोचना की, तो कुछ ने "1984" की ओर इशारा करने वाले emoji डाले।
Google का पक्ष
Google का कहना है कि वह पूर्व कर्मचारियों पर ऐसी पाबंदियां लागू नहीं करता। कंपनी के अनुसार हाल के बदलाव में नए कर्मचारियों के अनुबंध से वह प्रावधान हटा दिया गया है जो आलोचना पर रोक को नौकरी खत्म होने के बाद तक बढ़ाता था। कंपनी यह भी कहती है कि वह सुरक्षा और जिम्मेदारी पर खुली चर्चा को प्रोत्साहित करती है और समस्याएं उठाने के लिए आंतरिक चैनल देती है।
विवाद की जड़ यहीं है। मौजूदा कर्मचारी चाहते हैं कि यही बदलाव पुराने अनुबंधों पर भी लागू हो। किसी प्रावधान को लागू न करने का मौखिक या सार्वजनिक आश्वासन और उसे हस्ताक्षरित अनुबंध से हटाना, दोनों एक बात नहीं हैं।
भरोसे का सवाल
उन्नत मॉडल बनाने वालों के पास ऐसी जानकारी होती है जो जनता के पास नहीं है। फिर भी आलोचक कर्मचारी अपने-आप निष्पक्ष निर्णायक नहीं बन जाता। वह जोखिम का गलत आकलन कर सकता है या कारोबारी संदर्भ पूरी तरह न जानता हो। इसलिए न तो कर्मचारियों को पूरी तरह चुप कराना समाधान है, न हर आंतरिक असहमति को सार्वजनिक लीक में बदलना।
फिर भी मौजूदा AI मॉडल में समाज से बहुत भरोसा मांगा जाता है, क्योंकि कंपनियां खुद मॉडल बनाती हैं और काफी परीक्षण भी खुद करती हैं। विडंबना यह है कि Google अपनी AI पर भरोसा करने को कहता है, जबकि उसे बनाने वाले कुछ लोग इस औपचारिक गारंटी के लिए लड़ रहे हैं कि भरोसा न करने की स्थिति में वे बता सकें।
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