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Z2RAM: पैट गेल्सिंगर का दांव उस मेमोरी पर, जो तोड़ेगी मेमोरी वॉल

इंटेल के पूर्व प्रमुख पैट गेल्सिंगर Nagare Labs की Z2RAM में निवेश कर रहे हैं। दावा है कि यह स्टैक होने वाली मेमोरी SRAM जैसी बैंडविड्थ और DRAM के करीब घनत्व देगी।

Conceptual illustration of stacked memory layers sitting directly above an AI accelerator chip.
छवि: Spider's Web

इंटेल के पूर्व प्रमुख पैट गेल्सिंगर ने स्टार्टअप Nagare Labs की नई मेमोरी तकनीक Z2RAM में निवेश किया है। कंपनी का दावा है कि यह SRAM जैसी बैंडविड्थ, DRAM के करीब घनत्व और NAND की तरह परतें जोड़ने की क्षमता एक साथ दे सकती है। फिलहाल ये लक्ष्य और दावे हैं, तैयार उत्पाद के आंकड़े नहीं।

प्रोसेसर तेज़, डेटा धीमा

AI एक्सेलरेटर और प्रोसेसर लगातार तेज़ हो रहे हैं, लेकिन अब अड़चन गणना की नहीं, डेटा समय पर पहुंचाने की है। इसे "मेमोरी वॉल" कहा जाता है। पिछले तीन दशकों में चरम कंप्यूटिंग प्रदर्शन औसतन करीब 70 प्रतिशत सालाना बढ़ा, जबकि मेमोरी बैंडविड्थ लगभग 20 प्रतिशत सालाना। नतीजतन प्रोसेसर की कुछ क्षमता बेकार रह जाती है।

जनरेटिव AI में यह समस्या और गंभीर है, क्योंकि बड़े मॉडलों के पैरामीटर बार-बार मेमोरी और कंप्यूट यूनिट के बीच भेजने पड़ते हैं। Nagare Labs का कहना है कि HBM से एक वैल्यू लाने में उस पर ऑपरेशन करने की तुलना में लगभग हज़ार गुना ज़्यादा ऊर्जा लग सकती है। यह कंपनी का अपना दावा है।

Z2RAM कैसे अलग है

Nagare Labs जॉर्जिया टेक की स्पिन-ऑफ कंपनी है। इसके सह-संस्थापक प्रोफ़ेसर सुमन दत्ता और शिमेंग यू हैं। दत्ता इंटेल के High-k/Metal Gate और Tri-Gate ट्रांज़िस्टर से जुड़े रहे हैं, जबकि यू ने ओपन-सोर्स सिम्युलेटर NeuroSim बनाया।

पारंपरिक DRAM सेल में एक ट्रांज़िस्टर और एक कैपेसिटर होता है, और उसका रीड नष्ट करने वाला होता है। Z2RAM में कैपेसिटर नहीं है। सेल में दो ट्रांज़िस्टर हैं और चार्ज दूसरे ट्रांज़िस्टर की गेट कैपेसिटेंस में रहता है, इसलिए रीड नॉन-डिस्ट्रक्टिव है और लेटेंसी घटनी चाहिए।

तकनीक ऑक्साइड सेमीकंडक्टर पर आधारित है। कंपनी मेमोरी की परतें सीधे एक्सेलरेटर के ऊपर रखना चाहती है, बिना इंटरपोज़र के। वर्टिकल कनेक्शन से डेटा को मिलीमीटर के बजाय माइक्रोमीटर की दूरी तय करनी होगी। ट्रांसफ़र ऊर्जा का लक्ष्य एक पिकोजूल प्रति बिट से काफ़ी कम बताया गया है।

आंकड़े और आगे की राह

पहली पीढ़ी छह परतों के साथ SRAM से पांच गुना घनत्व का लक्ष्य रखती है। जिस जगह में 64 MB का SRAM टाइल आता है, वहां लगभग 320 MB मेमोरी समा सकती है, वह भी SRAM जैसी बैंडविड्थ के साथ। रोडमैप में आगे 100 से ज़्यादा परतें हैं।

यह विचार AMD के 3D V-Cache जैसा है, यानी तेज़ मेमोरी को लॉजिक के बिल्कुल पास रखना, पर Nagare Labs का लक्ष्य कहीं बड़ा है। असली परीक्षा यह होगी कि दावे सिलिकॉन पर खरे उतरते हैं या नहीं।

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