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University of Kentucky के अधिकारी को AI से धार्मिक छूट मिली

University of Kentucky के अधिकारी डेविड डॉरमन को मानवतावादी मान्यताओं के आधार पर काम में AI टूल्स का इस्तेमाल न करने की धार्मिक छूट मिली है।

A university administrator working at a desk with pen and paper while a laptop with an AI chatbot sits closed beside them.
छवि: اليوم السابع

अमेरिका की University of Kentucky के अधिकारी डेविड डॉरमन को काम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल न करने की धार्मिक छूट मिल गई है। डॉरमन का कहना है कि इस तकनीक पर निर्भर रहना उनकी मानवतावादी और धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है।

डॉरमन के मुताबिक, सोचने-समझने के काम चैटबॉट को सौंपने से एक "नैतिक कर्ता" के रूप में उनका विकास रुक सकता है। उन्हें लगता है कि इससे सोचने के कौशल और दूसरों के साथ व्यवहार की क्षमता भी कमज़ोर पड़ेगी।

अमेरिकन ह्यूमनिस्ट एसोसिएशन की मदद से आवेदन

अमेरिकन ह्यूमनिस्ट एसोसिएशन की मदद से डॉरमन ने संघीय नागरिक अधिकार कानून के टाइटल VII के तहत आवेदन किया। यह कानून कार्यस्थल पर भेदभाव रोकता है और कर्मचारियों को "धार्मिक सुविधा" मांगने का अधिकार देता है। विश्वविद्यालय ने सितंबर में उनकी अर्ज़ी मंज़ूर कर ली। यह जानकारी Futurism के हवाले से सामने आई है।

यूनिवर्सिटी के समान अवसर कार्यालय को भेजे पत्र में डॉरमन ने लिखा कि मशीनी प्रोसेसिंग को मानवीय उपस्थिति, सच्चे ढंग से सुनने और व्यक्तिगत जवाबदेही की जगह देना मानवीय गरिमा और समृद्धि को प्राथमिकता देने की उनकी प्रतिबद्धता से सीधे टकराता है। उनके लिए यह केवल तकनीकी पसंद का मामला नहीं है।

संगठन की वकील अलेक्ज़ेंड्रिया हुईस्किन्स ने Religion News Service को बताया कि पहली बार किसी मानवतावादी को अंतरात्मा की स्वतंत्रता के उल्लंघन के आधार पर ऐसी छूट मिली है। उनके अनुसार मानवतावाद जीवन जीने का समग्र तरीका है और कार्यस्थल पर उसे भी वही अवसर मिलना चाहिए, जो ईसाइयों और मुसलमानों को मिलता है।

पहले भी मिल चुकी है ऐसी छूट

डॉरमन ऐसी छूट पाने वाले पहले अमेरिकी नहीं हैं। नॉर्थ कैरोलिना की सॉफ्टवेयर इंजीनियर एरिन माउस को, जो यूनिटेरियन यूनिवर्सलिस्ट चर्च की सदस्य हैं, इस साल गर्मियों में ऐसी ही छूट मिली थी। उन्होंने AI से जुड़ी नैतिक और पर्यावरणीय चिंताओं को अपनी धार्मिक मान्यताओं के विपरीत बताया था।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब दुनिया भर के धार्मिक नेता AI के असर पर चर्चा कर रहे हैं। पोप लियो ने AI के इस्तेमाल पर आपत्तिपूर्ण रुख अपनाया है। डॉरमन का रुख MIT के वैज्ञानिकों के गढ़े शब्द "कॉग्निटिव सरेंडर" से भी मेल खाता है, जो इंसानों के अपनी मानसिक क्षमता AI को सौंप देने को दर्शाता है।

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