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शिगेरू मियामोतो की राय: जेनेरेटिव AI के बाद भी रहेगी हमारी भूमिका

73 वर्षीय मियामोतो जेनेरेटिव AI को वर्ड प्रोसेसर जैसा बदलाव मानते हैं। उनके मुताबिक असली रचनात्मक प्रतिभा की जगह बनी रहेगी।

Shigeru Miyamoto, creator of Super Mario and The Legend of Zelda, speaking at a press event.
छवि: xataka.com

'सुपर मारियो' और 'द लेजेंड ऑफ ज़ेल्डा' के रचयिता शिगेरू मियामोतो का मानना है कि जेनेरेटिव AI इंसानों की जगह पूरी तरह नहीं ले सकेगा, कम से कम तब तक नहीं जब बात असली प्रतिभा की हो। उनके शब्दों में, अगर AI सब कुछ संभालने भी लगे, तब भी "हमारे लिए हमेशा एक भूमिका रहेगी"।

73 वर्षीय मियामोतो ने यह बात कुछ दिन पहले पत्रकारों से बातचीत में कही। मौका था जापान के प्रतिष्ठित ऑर्डर ऑफ कल्चर सम्मान का, जो कला, विज्ञान और तकनीक में योगदान के लिए दिया जाता है। AI पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने नाटकीय जवाब देने के बजाय अपने अनुभव का सहारा लिया।

टाइपराइटर से वर्ड प्रोसेसर तक

मियामोतो ने कहा कि उनकी पीढ़ी ने कंप्यूटिंग का तेज़ विकास देखा है, जब टाइपराइटर से वर्ड प्रोसेसर तक औज़ार लगातार बदलते रहे। उनके अनुसार ऐसे औज़ारों से किसी तकनीक में महारत के बजाय व्यक्ति की रचनात्मक क्षमता ज़्यादा उभरकर सामने आई। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि जेनेरेटिव AI भी ऐसा ही बदलाव है।"

उन्होंने एक जोखिम की ओर भी इशारा किया: रचना करना अपने आप में संतोष देता है, लेकिन इंसान काम में मिले संतोष को देखकर गलती से मान सकता है कि उसने बेहतरीन चीज़ बनाई है। यानी किसी डिज़ाइन पर घंटों लगाना उसके अच्छा होने की गारंटी नहीं है। मियामोतो के अनुसार, "जितना ज़्यादा AI ऐसे कामों की जगह लेगा, उतने ज़्यादा मौके मिलेंगे यह सोचने के कि वास्तव में क्या मायने रखता है।" उनके लिए रचनाकार का इरादा ही सब कुछ है, और कॉपी-पेस्ट से बने डिज़ाइन "शायद ही समय की कसौटी पर टिकते हैं"।

गेम इंडस्ट्री में AI

यह बहस गेमिंग उद्योग में पहले से गर्म है। 2025 के एक सर्वे के मुताबिक 87% गेम डेवलपर रोज़मर्रा के काम में AI एजेंट इस्तेमाल कर रहे थे, चाहे कोड लिखना हो, संवाद बनाना हो या लेवल डिज़ाइन करना हो। पर AI को औज़ार की तरह इस्तेमाल करना और पूरा काम उसी पर छोड़ देना अलग बातें हैं।

पिछले दिसंबर Steam पर पूरी तरह AI से बने गेम Codex Mortis का डेमो आया था। खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया बेहद नकारात्मक रही और कुछ ने उसे "बिना आत्मा की मशीनों से बना कचरा" तक कहा। मियामोतो की बात इसी ओर इशारा करती है: AI गेम बनाने में मदद कर सकता है, पर वह रचनात्मकता और विचार, जो किसी गेम को खेलने लायक बनाते हैं, अलग चीज़ हैं।

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