TRAI ने सैटेलाइट डायरेक्ट-टू-डिवाइस कनेक्टिविटी का समर्थन किया
TRAI ने डायरेक्ट-टू-डिवाइस सैटेलाइट कनेक्टिविटी की अनुमति और सैटेलाइट नेटवर्क प्रदाताओं के लिए अलग authorisation की सिफारिश की है। इसके लिए सरकारी मंजूरी जरूरी है।

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने सैटेलाइट नेटवर्क प्रदाताओं के लिए अलग authorisation की सिफारिश की है। साथ ही उसने सैटेलाइट और टेरेस्ट्रियल मोबाइल स्पेक्ट्रम के जरिए डायरेक्ट-टू-डिवाइस (D2D) सेवाओं की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा है। इससे संगत स्मार्टफोन सीधे सैटेलाइट से जुड़ सकेंगे और उन इलाकों तक कनेक्टिविटी पहुंच सकती है, जहां पारंपरिक मोबाइल कवरेज नहीं है।
ये सिफारिशें अभी सरकार की मंजूरी पर निर्भर हैं और इनसे व्यावसायिक D2D सेवाएं तुरंत शुरू नहीं होतीं।
SCN authorisation कैसे काम करेगा
प्रस्तावित Satellite Communication Network (SCN) Provider Authorisation के तहत कंपनियां सैटेलाइट नेटवर्क बना और चला सकेंगी तथा पात्र टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं को क्षमता बेच सकेंगी। इस authorisation के तहत वे सीधे उपभोक्ताओं को सेवा नहीं दे पाएंगी। मोबाइल या ब्रॉडबैंड सेवा बेचने के लिए उन्हें संबंधित सर्विस लाइसेंस या authorisation लेना होगा।
यानी एक कंपनी सैटेलाइट नेटवर्क चला सकती है, जबकि दूसरी ग्राहकों को कनेक्टिविटी बेचेगी। टेलीकॉम ऑपरेटर साझेदारी के जरिए सैटेलाइट ढांचे तक पहुंच पाएंगे और ग्राहक संबंध अपने पास रखेंगे। यह authorisation पूरे देश के लिए होगा, 20 साल तक वैध रहेगा और 20 साल तक के लिए नवीनीकृत हो सकेगा।
D2D के दो रास्ते और शुल्क
TRAI ने D2D के लिए दो रास्ते सुझाए हैं: मोबाइल सैटेलाइट सेवाओं के लिए तय स्पेक्ट्रम, या टेरेस्ट्रियल मोबाइल ऑपरेटरों को पहले से आवंटित स्पेक्ट्रम। पहले रास्ते के लिए उसने सरकार से कहा है कि वह हैंडसेट निर्माताओं को भारत में बिकने वाले भावी स्मार्टफोन में संबंधित सैटेलाइट बैंड का सपोर्ट देने के लिए प्रोत्साहित करे। दूसरे रास्ते में ऑपरेटर अपने मौजूदा मोबाइल स्पेक्ट्रम के उपयोग के लिए सैटेलाइट प्रदाताओं से साझेदारी कर सकते हैं, पर भाग लेने वाले ऑपरेटरों को सभी 22 लाइसेंस्ड सेवा क्षेत्रों में संबंधित फ्रीक्वेंसी चैनल collectively रखना होगा और उसके उपयोग पर सहमत होना होगा।
TRAI ने इसे World Radiocommunication Conference 2027 का इंतजार किए बिना अनुमति देने की सिफारिश की है। सैटेलाइट सेवाओं को मौजूदा अधिकृत सेवाओं में बाधा नहीं डालनी होगी और उनसे होने वाले interference से सुरक्षा का दावा भी नहीं कर सकेंगी।
authorisation शुल्क समायोजित सकल राजस्व (AGR) का 8% प्रस्तावित है, न्यूनतम शुल्क नहीं होगा। सरकार से मिला सैटेलाइट स्पेक्ट्रम पांच साल के लिए वैध होगा, जिसे दो साल तक बढ़ाया जा सकेगा, और उस पर सालाना न्यूनतम ₹3,500 प्रति MHz शुल्क लगेगा। ऑपरेटर के मौजूदा मोबाइल स्पेक्ट्रम पर D2D के लिए अतिरिक्त शुल्क नहीं होगा।
ये प्रस्ताव ऐसे समय आए हैं, जब Starlink, Bharti समर्थित Eutelsat OneWeb और Reliance Jio भारत के सैटेलाइट कनेक्टिविटी बाजार में पैर जमाने की कोशिश कर रहे हैं।
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