Osegi
स्टार्टअप·2 मिनट में पढ़ें

Skyroot की कक्षा में सफलता के बाद भारतीय VC की जोखिम क्षमता पर बहस

Vikram-1 के कक्षा में पहुंचने के बाद पत्रकार Ashlee Vance ने पूछा कि भारतीय VC जोखिम से क्यों डरते हैं। अब डीपटेक फंडिंग पर फाउंडर और निवेशक आमने-सामने हैं।

A rocket on a launch pad at dawn, symbolising India's private space industry and the debate over deeptech funding.
छवि: Inc42 Media

18 जुलाई 2026 को Skyroot Aerospace के Vikram-1 रॉकेट ने सफलतापूर्वक उपग्रहों को कक्षा में स्थापित किया। यह कक्षीय प्रक्षेपण करने वाला भारत का पहला निजी रूप से विकसित रॉकेट बना। अब इस उपलब्धि के बाद देश के वेंचर कैपिटल (VC) तंत्र पर तीखी बहस छिड़ गई है।

इलॉन मस्क की बेस्टसेलर जीवनी के लेखक और अमेरिकी पत्रकार Ashlee Vance ने 22 अक्टूबर को एक पोस्ट में पूछा, "भारतीय VC जोखिम लेने और पैसा कमाने से इतना क्यों डरते हैं?" यह पोस्ट भारत की उभरती हार्डवेयर अर्थव्यवस्था पर उनके Core Memory फीचर के साथ आई थी। तीन हफ्ते में 15 भारतीय कंपनियों से मिलने के बाद उन्होंने कहा कि उन्होंने शायद ही कोई ऐसा बाजार देखा जहां फाउंडरों में VC की छवि इतनी खराब हो।

फाउंडरों की शिकायतें

कुत्तों की मदद से कैंसर की पहचान की तकनीक बना रही Dognosis के संस्थापक Akash Kulgod ने करीब 80 निवेशकों से बातचीत का अनुभव साझा किया, जिनमें लगभग 65% अमेरिका के थे। उनके मुताबिक अमेरिकी निवेशक जल्दी फैसला करते हैं, जबकि कुछ भारतीय निवेशक बार-बार बैठकों के बाद व्यावसायिक ट्रैक्शन मांगते हैं या जवाब देना बंद कर देते हैं। अन्य फाउंडरों ने IIT-IIM डिग्री और दूसरे निवेशकों की साख पर निर्भरता की बात उठाई। ये व्यक्तिगत अनुभव हैं, सभी VC पर लागू होने वाला प्रमाण नहीं। निवेशकों ने जवाब में डीपटेक सफलताओं, बढ़ती विशेषज्ञ पूंजी और वैज्ञानिक नवाचार की संरचनात्मक चुनौतियों का हवाला दिया।

आंकड़े क्या कहते हैं

Inc42 DataLabs के अनुसार 2025 में भारतीय डीपटेक स्टार्टअप्स ने 87 सौदों में लगभग 50 करोड़ डॉलर जुटाए। 2026 की तीसरी तिमाही में यह फंडिंग 176% बढ़कर 29 करोड़ डॉलर हो गई, लेकिन सौदों की संख्या 29 से घटकर 28 रह गई। अकेले Pixxel का 10 करोड़ डॉलर का राउंड करीब एक-तिहाई राशि के बराबर रहा, और बेंगलुरु को लगभग 65% फंडिंग मिली। शुरुआती चरण की फंडिंग 18% घटकर 16.4 करोड़ डॉलर (93 सौदे) रही, जबकि औसत चेक 20% बढ़कर 12 लाख डॉलर हो गया।

यानी बड़ी रकम कम, तकनीकी रूप से परखी हुई कंपनियों की ओर जा रही है। AI के कारण सॉफ्टवेयर सेवाओं पर दबाव बढ़ने के दौर में असली सवाल यह है कि क्या भारतीय पूंजी बार-बार ऐसे बुनियादी तकनीकी प्रयोगों पर दांव लगाने को तैयार है।

टैग:indiadeeptechventure capitalskyroot aerospacepixxelashlee vance

इसी दिन की और ख़बरें

सभी देखें →

और पढ़ें:: स्टार्टअप

सभी देखें →