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MeitY ने AI ट्रेनिंग के लिए DEPA फ्रेमवर्क का प्रस्ताव रखा

आईटी मंत्रालय ने सहमति-आधारित DEPA फ्रेमवर्क प्रस्तावित किया है, जिससे स्टार्टअप और शोधकर्ता कच्चा डेटा पाए बिना बड़े डेटासेट पर AI मॉडल ट्रेन कर सकेंगे।

Illustration of secure data servers and a padlock representing consent-based data sharing for AI training in India.
छवि: Inc42 Media

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने भारत में AI मॉडल की ट्रेनिंग के लिए डेटा साझा करने का सहमति-आधारित फ्रेमवर्क प्रस्तावित किया है। इसका नाम है डेटा एम्पावरमेंट एंड प्रोटेक्शन आर्किटेक्चर (DEPA) फॉर AI ट्रेनिंग।

मंत्रालय का कहना है कि इसका मकसद स्टार्टअप, कारोबारों और शैक्षणिक संस्थानों को भारत-विशिष्ट बड़े डेटासेट तक पहुँच दिलाना है, ताकि नागरिकों की निजता सुरक्षित रहे और DPDP अधिनियम का पालन भी हो। यह दिशानिर्देश थिंक टैंक iSPIRT के सहयोग से तैयार किए गए हैं।

चार तकनीकी स्तंभ

प्रस्तावित ढाँचा भारत के मौजूदा DEPA पर आधारित है, जो पहले से अकाउंट एग्रीगेटर जैसी पहलों के जरिए सहमति-आधारित डेटा साझाकरण को सपोर्ट करता है। इसमें चार स्तंभ बताए गए हैं: कॉन्फिडेंशियल क्लीन रूम, डिफरेंशियल प्राइवेसी, इलेक्ट्रॉनिक कॉन्ट्रैक्ट और ज़ीरो-ट्रस्ट सिक्योरिटी। क्लीन रूम में संस्थाएँ एक-दूसरे को डेटा दिखाए बिना मॉडल ट्रेन कर सकती हैं। डिफरेंशियल प्राइवेसी यह सुनिश्चित करती है कि समग्र डेटा से किसी व्यक्ति की जानकारी निकाली न जा सके।

फ्रेमवर्क में तीन पक्ष हैं: ट्रेनिंग डेटा प्रोवाइडर (जैसे बैंक, अस्पताल, सरकारी एजेंसियाँ), ट्रेनिंग डेटा कंज्यूमर (स्टार्टअप, कंपनियाँ, शोधकर्ता और व्यक्ति) और डेटा कलेक्टिव, जो अलग-अलग स्रोतों का डेटा एकत्र कर नियम तय करते हैं।

प्रक्रिया और निगरानी

प्रोवाइडर पहले डेटासेट को गुमनाम और एन्क्रिप्ट कर डेटा एक्सचेंज प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत करेंगे। कंज्यूमर के अनुरोध की जाँच इलेक्ट्रॉनिक कॉन्ट्रैक्ट प्रणाली नीतियों के आधार पर करेगी। अनुमति मिलने पर मॉडल सुरक्षित वातावरण में ट्रेन होगा और कच्चा डेटा कंज्यूमर तक नहीं पहुँचेगा।

ट्रेन किए गए मॉडल की पक्षपात, निष्पक्षता, सुरक्षा और व्याख्यात्मकता पर स्वतंत्र जाँच होगी। केवल पास होने वाले मॉडल को पायलट तैनाती और विस्तार की मंजूरी मिलेगी। तैनाती के बाद भी लगातार निगरानी और आवधिक समीक्षा जारी रहेगी।

यह घोषणा ऐसे समय आई है जब TRAI ने टेलीकॉम नेटवर्क में AI के जिम्मेदार उपयोग पर मसौदा दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिन पर 27 नवंबर तक राय माँगी गई है। कुछ हफ्ते पहले आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि AI की सुरक्षा पर नियमन के लिए एक महीने में परामर्श पत्र आएगा।

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