Los Angeles के 96 करोड़ नहीं, 9.6 करोड़ शेड बॉल्स: 11 साल बाद
Los Angeles ने 2015 में जलाशय को 9.6 करोड़ काली प्लास्टिक गेंदों से ढका था। 11 साल बाद इन्हें बदलने का सवाल और इनके निर्माण में लगा पानी फिर चर्चा में है।

अगस्त 2015 में Los Angeles ने सिल्मार स्थित अपने एक प्रमुख जलाशय में 9.6 करोड़ (96 मिलियन) काली प्लास्टिक गेंदें डाली थीं। अब 11 साल बाद सवाल यह है कि अपनी अनुमानित उम्र पूरी कर चुकी इन गेंदों का क्या होगा, और इन्हें बनाने में लगे पानी की कीमत कितनी थी।
गेंदें क्यों डाली गईं
कैलिफ़ोर्निया उस समय 2011 से 2017 तक चले ऐतिहासिक सूखे से गुज़र रहा था। लगभग 70 हेक्टेयर के जलाशय को ढकने पर 3.45 करोड़ डॉलर खर्च हुए। दावा था कि इससे हर साल 110 करोड़ लीटर से ज़्यादा पानी वाष्पीकरण में जाने से बचेगा।
लेकिन मुख्य मक़सद रासायनिक था। धूप में पानी में मौजूद ब्रोमाइड ब्रोमेट में बदल जाता है, जो संभावित कैंसरकारी है और पीने के पानी में जिसकी मात्रा नियंत्रित है। गेंदें करीब 95% धूप रोकती थीं, शैवाल की वृद्धि घटाती थीं और क्लोरीन की ज़रूरत कम करती थीं।
हर गेंद लगभग 10 सेंटीमीटर की है और हाई-डेंसिटी पॉलीएथिलीन से बनी है। कार्बन ब्लैक उसे यूवी किरणों से बचाता है, जबकि अंदर भरा कुछ पानी उसे हवा से हिलने नहीं देता। जलाशय को बांटकर तैरते आवरण बनाने का विकल्प कम से कम 30 करोड़ डॉलर का था।
निर्माण का छिपा पानी
जुलाई 2018 में Nature में छपे शोध में MIT, Imperial College London और University of Twente के शोधकर्ताओं ने पॉलीएथिलीन का जल-पदचिह्न आंका। उनके अनुमान के अनुसार निर्माण में 25 करोड़ से 290 करोड़ लीटर पानी लग सकता था। संदर्भ परिदृश्य में 96 मिलियन गेंदों के लिए करीब 29 लाख घन मीटर पानी चाहिए था, जबकि सूखे के दौरान अनुमानित बचत 17 लाख घन मीटर थी। इसकी भरपाई में लगभग ढाई साल लगते, बशर्ते बचत इसी रफ़्तार से जारी रहती।
अब आगे क्या
गेंदों की अनुमानित उम्र कम से कम दस साल थी। LADWP के अनुसार समय के साथ ये कमज़ोर होकर जोड़ों से खुल या टूट सकती हैं, इसलिए इन्हें हटाने, रीसायकल करने और बदलने की योजना है। फिलहाल यह पुष्ट नहीं है कि कितनी गेंदें खराब हुईं या बदली गईं, और न ही पूर्ण नवीनीकरण का कोई ताज़ा कार्यक्रम सामने है। यह भी आधिकारिक रूप से नहीं बताया गया कि इनकी जगह तैरते सोलर पैनल या कोई अन्य प्रणाली आएगी या नहीं।
शोध का निष्कर्ष यह नहीं था कि गेंदें बेकार थीं। उन्होंने स्वच्छ पानी की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाई और बड़े आवरणों से कहीं सस्ती रहीं। सबक यह है कि किसी शहर की समस्या का हल कई बार पानी, ऊर्जा और कच्चे माल की लागत दूसरे इलाक़ों पर डाल सकता है।
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