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SIM-बाइंडिंग नियम से सुरक्षा को खास फायदा नहीं: Esya Centre

Esya Centre के अध्ययन के मुताबिक मैसेजिंग ऐप के लिए SIM-बाइंडिंग नियम से यूज़र और MSME को दिक्कत होगी, जबकि फिशिंग और मैलवेयर जैसे साइबर फ्रॉड पर असर कम रहेगा।

A smartphone showing a messaging app beside a SIM card, illustrating India's proposed SIM-binding requirement.
छवि: mint

थिंक टैंक Esya Centre के नए अध्ययन में कहा गया है कि भारत में मैसेजिंग ऐप को SIM कार्ड से जोड़ने का प्रस्तावित नियम उपभोक्ताओं और MSME के कामकाज में बाधा डाल सकता है, लेकिन साइबर सुरक्षा के लिहाज से इसका फायदा सीमित रहेगा। रिपोर्ट के अनुसार फिशिंग, क्रेडेंशियल चोरी, मैलवेयर और सेशन हाइजैकिंग जैसे बड़े तरीके इससे काफी हद तक अछूते रहेंगे।

"Rethinking India's SIM Binding Mandate: An Empirical Assessment" नाम की यह रिपोर्ट दूरसंचार विभाग (DoT) के आदेश के असर को परखती है। अध्ययन में 18 शहरों के 2,033 उपभोक्ताओं और 17 शहरों के 353 कारोबारों से राय ली गई। DoT ने नवंबर 2025 में इंटरनेट-आधारित मैसेजिंग ऐप को सक्रिय SIM से जोड़ने का निर्देश दिया था। शुरुआत में वेब सेशन हर 6 घंटे की निष्क्रियता पर लॉग-आउट करने की शर्त थी, जिसे सरकार ने बाद में जोखिम-आधारित व्यवस्था में बदल दिया।

उपभोक्ताओं पर असर

सर्वे में शामिल 98.88% उपभोक्ताओं ने माना कि SIM निष्क्रिय होने पर मैसेजिंग एक्सेस खोना असुविधाजनक होगा। 98% को आपात स्थिति में इंटरनेट इस्तेमाल न कर पाने की चिंता थी। कंपैनियन डिवाइस इस्तेमाल करने वाले 97.7% लोगों ने कहा कि जबरन लॉग-आउट से दिक्कत होगी। विदेश यात्रा करने वालों में 67.1% स्थानीय नंबर, Wi-Fi या अन्य डेटा कनेक्शन पर निर्भर थे, जबकि 33% भारतीय SIM के साथ इंटरनेशनल रोमिंग इस्तेमाल करते थे।

MSME पर बढ़ता खर्च

सर्वे में शामिल 92% कारोबारों के पास कंपैनियन-डिवाइस एक्सेस था और 86% अपने सभी डिवाइस पर एक ही बिज़नेस नंबर चलाते थे। 78% ने कहा कि फोन तक पहुंच सीमित होना मध्यम या बेहद बाधाकारी होगा, जबकि 83.5% को कामकाज में देरी और गलतियों की आशंका थी। 76.3% MSME ने भारी अतिरिक्त लागत का अनुमान जताया। इनमें 60.6% ने कार्यस्थल खर्च, 58.6% ने डिवाइस और उपकरणों पर खर्च और 55% ने अतिरिक्त स्टाफ की बात कही।

असरदार है या नहीं

87.2% कारोबार SIM फ्रॉड को लेकर चिंतित हैं, फिर भी 81% को नहीं लगता कि SIM-बाइंडिंग कारगर सुरक्षा उपाय है। 59% उपभोक्ताओं को भी संदेह है कि इससे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म सुरक्षित होंगे। करीब 41% उपभोक्ता दूसरा SIM लेंगे और 30.3% नया डिवाइस खरीदेंगे।

रिपोर्ट मजबूत KYC, SIM जारी करने पर सख्त नियंत्रण, बेहतर फ्रॉड-डिटेक्शन और म्यूल-अकाउंट नेटवर्क पर कार्रवाई जैसे जोखिम-आधारित उपाय सुझाती है। साथ ही बड़े नियामकीय बदलाव से पहले उपभोक्ता लागत, कारोबार और संचार की विश्वसनीयता तथा साइबर सुरक्षा के फायदों का विस्तृत आकलन करने की सिफारिश की गई है।

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