ESA समर्थित JASPER सिस्टम पायलटों को GPS स्पूफिंग की चेतावनी देगा
यूरोपीय स्पेस एजेंसी जर्मनी में बन रहे JASPER को समर्थन दे रही है। यह कॉकपिट में जुड़ने वाला उपकरण GPS जैमिंग और स्पूफिंग पकड़कर क्रू को अलर्ट करेगा।

यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) जर्मनी में विकसित हो रहे JASPER नाम के उपकरण को समर्थन दे रही है। इसका काम नकली GPS सिग्नल पहचानना और पायलटों को समय रहते चेतावनी देना है। परियोजना के पहले चरण के नतीजे 22 अक्टूबर को पेश किए गए।
क्या है JASPER
JASPER यानी Jamming/Spoofing Event Recognition System को यात्री विमानों के लिए तैयार किया जा रहा है। इसे जर्मन एवियोनिक्स निर्माता f.u.n.k.e. AVIONICS और जर्मन एयरोस्पेस सेंटर DLR मिलकर बना रहे हैं। इसे ESA के NAVISP कार्यक्रम से फंडिंग मिली है, जो नेविगेशन तकनीकों के विकास के लिए है।
सिस्टम दो तरह की गड़बड़ी पकड़ेगा। जैमिंग में कक्षा से आने वाला कमज़ोर सैटेलाइट सिग्नल ज़्यादा शक्तिशाली रेडियो ट्रांसमिशन से दब जाता है, इसलिए रिसीवर लोकेशन तय नहीं कर पाता। स्पूफिंग ज़्यादा खतरनाक है, क्योंकि रिसीवर को असली जैसा दिखने वाला सिग्नल मिलता है, पर उसमें स्थिति या समय की जानकारी गलत होती है। सिस्टम सामान्य दिखता है, फिर भी गलत जगह दिखा सकता है।
कॉकपिट में कैसे काम करेगा
JASPER की बुनियाद DLR का विकसित सैटेलाइट रिसीवर है, जिसे पहले उड़ान परीक्षणों में परखा जा चुका है। f.u.n.k.e. AVIONICS इसे यात्री विमानों के अनुकूल समाधान में बदल रही है। शुरुआती फोकस Airbus A320 पर है। यह अतिरिक्त उपकरण होगा, मौजूदा नेविगेशन रिसीवर की जगह नहीं लेगा और विमान की एवियोनिक्स में गहरे बदलाव की ज़रूरत नहीं होगी।
चेतावनियाँ Electronic Flight Bag के ज़रिए पायलटों को दिखेंगी। यह वह इलेक्ट्रॉनिक टूल है जिसमें क्रू दस्तावेज़, नक्शे और उड़ान का डेटा देखते हैं। ध्यान रहे कि JASPER न तो गड़बड़ी हटाएगा और न विमान को स्पूफिंग से पूरी तरह सुरक्षित बनाएगा। वह सैटेलाइट नेविगेशन की विश्वसनीयता के बारे में क्रू को अतिरिक्त जानकारी देगा। डेवलपर Lufthansa, Eurowings और Condor से ज़रूरतों पर सलाह ले रहे हैं।
बाल्टिक क्षेत्र और आगे
सिस्टम पकड़ी गई गड़बड़ियों का डेटा रिकॉर्ड कर बाद में विश्लेषण भी कर सकेगा। कई विमानों के आंकड़ों से ऐसे इलाकों के नक्शे बन सकते हैं जहाँ नेविगेशन सिग्नल से छेड़छाड़ ज़्यादा होती है। बाल्टिक क्षेत्र में रूसी जैमिंग के कारण उपकरण अक्सर बिल्कुल अलग लोकेशन दिखाते रहे हैं। पोलैंड के बड़े हिस्से में भी GPS समस्याएँ दर्ज हुई हैं।
जुलाई 2026 में EASA ने जैमिंग और स्पूफिंग पर अपनी सिफारिशें अपडेट की थीं। इनमें इलेक्ट्रॉनिक ऑनबोर्ड टूल्स, क्रू प्रशिक्षण और एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संवाद की प्रक्रियाएँ शामिल हैं।
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