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UNEP रिपोर्ट: ट्रंप राज में अमेरिका का CO2 उत्सर्जन 13.3 करोड़ टन बढ़ा

UNEP की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल अमेरिका का CO2 उत्सर्जन 13.3 करोड़ टन बढ़ा, जो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे ज़्यादा है। वजह जलवायु नीतियों की वापसी है।

Smokestacks of a coal-fired power plant releasing emissions into the sky at dusk.
छवि: ギズモード・ジャパン

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की नई रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल अमेरिका का कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन 13.3 करोड़ टन बढ़ गया। अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में यह सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। रिपोर्ट इसकी वजह बिजली की मांग में तेज़ उछाल और कोयला आधारित बिजली उत्पादन की वापसी बताती है।

प्रति व्यक्ति उत्सर्जन लगभग 18 टन तक पहुंच गया, जो रूस के साथ दुनिया में सबसे ऊपर है।

नीतियों की वापसी

रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप प्रशासन ने तेल और गैस उत्पादन तेज़ी से बढ़ाया, जबकि जलवायु नीतियों और स्वच्छ ऊर्जा को सहारा देने वाला ढांचा कमज़ोर किया। अमेरिका पेरिस समझौते से औपचारिक रूप से बाहर हो गया। "वन बिग ब्यूटीफुल बिल" कानून से इन्फ्लेशन रिडक्शन एक्ट के ज़्यादातर जलवायु प्रावधान रद्द हो गए। बिजली संयंत्रों, वाहनों और मीथेन उत्सर्जन के मानक भी ढीले किए गए, और इलेक्ट्रिक वाहनों व नवीकरणीय ऊर्जा को मिलने वाला संघीय समर्थन वापस लिया गया।

इसका असर अनुमानों पर दिखता है। बाइडन प्रशासन की नीतियां जारी रहतीं तो जितना उत्सर्जन होता, 2030 में अमेरिका का उत्सर्जन उससे करीब 90 करोड़ टन ज़्यादा रहने का अनुमान है।

1.5 डिग्री का लक्ष्य दूर

पेरिस समझौते का मकसद तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखना था, पर रिपोर्ट के अनुसार यह लक्ष्य अब व्यावहारिक रूप से पहुंच से बाहर है। सबसे अच्छे परिदृश्य में भी सदी के मध्य तक तापमान का शिखर 1.7 से 1.8 डिग्री से नीचे रोका जा सकता है। इसके लिए वैश्विक उत्सर्जन में 2030 तक 18% और 2035 तक 45% की कटौती और वातावरण से CO2 हटाने की क्षमता बढ़ाना ज़रूरी होगा।

सभी देश मौजूदा लक्ष्य पूरे कर लें और आगे भी प्रयास जारी रखें, तब भी 2100 तक तापमान वृद्धि को 2.6 डिग्री के भीतर रखने की संभावना केवल 66% है। पिछले साल की रिपोर्ट की तुलना में अनुमानित तापमान वृद्धि 0.2 से 0.3 डिग्री बढ़ी है, और इसका लगभग आधा हिस्सा अमेरिका के लक्ष्य छोड़ने से जुड़ा है।

रिपोर्ट तुर्किये में होने वाले COP31 से कुछ हफ्ते पहले आई है। इस बार सम्मेलन में 1.5 डिग्री लक्ष्य के हाथ से निकलने की सच्चाई से तात्कालिकता बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन अमेरिका के उसमें शामिल होने की संभावना कम बताई जा रही है।

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