Osegi
स्टार्टअप·1 मिनट में पढ़ें

दक्षिण-पूर्व एशिया और भारत की टेक कंपनियों में डेट फंडिंग की बढ़ती मांग

दक्षिण-पूर्व एशिया और भारत की टेक कंपनियों में कर्ज़ का आकर्षण बढ़ रहा है। निवेशक इस मांग को भुनाने की तैयारी में हैं और बाज़ार में कर्ज़दाताओं की होड़ तेज़ है।

Illustration of bank and investor icons financing tech companies across Southeast Asia and India.
छवि: techinasia.com

दक्षिण-पूर्व एशिया और भारत की टेक कंपनियों के बीच डेट फंडिंग यानी कर्ज़ के ज़रिए पूंजी जुटाने का चलन जोर पकड़ रहा है। इस बढ़ती मांग को देखते हुए निवेशक भी इस बाज़ार में अपनी स्थिति मज़बूत करने की तैयारी कर रहे हैं।

कर्ज़ क्यों बन रहा है पसंदीदा विकल्प

पारंपरिक रूप से स्टार्टअप और टेक कंपनियां इक्विटी फंडिंग पर निर्भर रही हैं। लेकिन अब कई कंपनियां कर्ज़ को भी एक व्यावहारिक विकल्प के रूप में देख रही हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस क्षेत्र में कर्ज़ की मांग बढ़ी है और इसी वजह से कर्ज़दाताओं के बीच प्रतिस्पर्धा भी तेज़ हो रही है।

निवेशकों के लिए मौका

जैसे-जैसे टेक कंपनियां कर्ज़ की ओर बढ़ रही हैं, निवेशक इस मांग का फायदा उठाने की योजना बना रहे हैं। इससे दक्षिण-पूर्व एशिया और भारत के टेक इकोसिस्टम में फंडिंग के स्रोतों का दायरा बढ़ सकता है।

स्टार्टअप संस्थापकों के लिए इसका मतलब है कि उनके पास पूंजी जुटाने के अधिक विकल्प होंगे। कर्ज़दाताओं की बढ़ती संख्या से शर्तों और प्रतिस्पर्धा पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, किन कर्ज़दाताओं की हिस्सेदारी कितनी है, इसका ब्योरा यहां उपलब्ध सामग्री में नहीं है।

आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि कौन-से कर्ज़दाता इस क्षेत्र की टेक कंपनियों के बीच अपनी पकड़ मज़बूत करते हैं और डेट फंडिंग का बाज़ार किस तरह आकार लेता है।

टैग:venture debtsoutheast asiaindiatech lendersstartup funding

इसी दिन की और ख़बरें

सभी देखें →

और पढ़ें:: स्टार्टअप

सभी देखें →