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BlanchTouch: AR हेडसेट के लिए दीवारें और डेस्क बनेंगे टच सतह

तोहोकू यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने BlanchTouch बनाया है। यह AI सिस्टम बिना सेंसर के दीवार और डेस्क पर उंगली का स्पर्श पहचान लेता है।

A user wearing an AR headset presses a fingertip against an office wall to control a virtual menu.
छवि: اليوم السابع

जापान की तोहोकू यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने BlanchTouch नाम की नई तकनीक विकसित की है। इसकी मदद से दीवार, डेस्क और पार्टिशन जैसी आम सतहों को बिना कोई सेंसर या अतिरिक्त उपकरण लगाए टच-इंटरैक्टिव क्षेत्र में बदला जा सकता है। यह तकनीक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और AR व मिक्स्ड रियलिटी हेडसेट के कैमरों पर आधारित है।

उंगली के रंग से पहचान

BlanchTouch उस प्राकृतिक बदलाव को पकड़ता है जो किसी सख्त सतह पर उंगली दबाने पर होता है। रक्त प्रवाह बदलने से उंगली के सिरे की त्वचा कुछ पल के लिए सफ़ेद पड़ जाती है। AI एल्गोरिदम इसी संकेत से पहचानते हैं कि उंगली सतह को कब छू रही है और उसे कंट्रोल कमांड के रूप में दर्ज करते हैं।

सिस्टम हेडसेट में पहले से मौजूद कैमरों से हाथ और उंगलियों की तस्वीरें लेता है। AI मॉडल उंगली के सिरे का रंग बदलना पहचानता है, फिर हैंड-ट्रैकिंग सिस्टम सतह पर उंगली की जगह तय करता है और उसे वर्चुअल बटन या मेनू के लिए डिजिटल कमांड में बदल देता है। दीवार या डेस्क पर कोई मार्कर या सेंसर नहीं लगाना पड़ता, और हर सतह के लिए पहले से कैलिब्रेशन भी ज़रूरी नहीं है।

हवा में इशारों की समस्या का हल

AR और मिक्स्ड रियलिटी डिवाइस में अक्सर हवा में हाथ चलाने या अलग कंट्रोलर इस्तेमाल करने पड़ते हैं। हाथ लंबे समय तक उठाए रखने से थकान होती है, और हवा के इशारों में असली सतह छूने जैसा भौतिक एहसास भी नहीं मिलता। नई तकनीक में उपयोगकर्ता उंगलियों को डेस्क या दीवार पर टिकाकर वर्चुअल इंटरफ़ेस चला सकता है, जिससे इस्तेमाल ज़्यादा आरामदायक और स्वाभाविक बनता है।

शोधकर्ताओं ने सिस्टम को अलग-अलग सतहों और सामग्रियों पर परखा। प्रयोगों में उंगली के स्पर्श की पहचान स्थिर सटीकता के साथ हुई, और प्रतिभागी आम सतहों पर इंटरैक्शन के काम पूरे कर सके। IEEE कॉन्फ्रेंस ऑन वर्चुअल रियलिटी एंड 3D यूज़र इंटरफ़ेस 2026 में प्रकाशित शोध के अनुसार, स्पर्श की जगह तय करने में औसत त्रुटि 5.33 मिलीमीटर रही और रिकॉल दर 97.88% दर्ज हुई।

आगे क्या

इसके उपयोग दफ़्तरों, कक्षाओं और कार्यस्थलों में दिख सकते हैं, जहाँ दीवारों और उपलब्ध सतहों से वर्चुअल कीबोर्ड और मेनू चलाए जा सकेंगे। इससे पारंपरिक कंट्रोलर पर निर्भरता घट सकती है। हालाँकि इसका मतलब यह नहीं कि कोई भी सामान्य स्क्रीन ऐप इंस्टॉल करते ही टचस्क्रीन बन जाएगी। फ़िलहाल तकनीक हैंड-ट्रैकिंग कैमरों वाले AR या मिक्स्ड रियलिटी डिवाइस पर निर्भर है।

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