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D-Vision SDR: यूक्रेनी सैनिकों को रूसी ड्रोन का लाइव वीडियो

कीव की स्टार्टअप का 290 ग्राम का हैंडहेल्ड रिसीवर यूक्रेनी सैनिकों को रूसी ड्रोन का लाइव वीडियो दिखाता है, लेकिन एन्क्रिप्टेड और फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन इसकी सीमा हैं।

A handheld radio receiver the size of a smartphone showing live video from a drone camera feed.
छवि: xataka.com

कीव की एक स्टार्टअप ने ऐसा हैंडहेल्ड रिसीवर बनाया है, जिससे यूक्रेनी सैनिक हवा में उड़ रहे रूसी ड्रोन के कैमरे का लाइव वीडियो देख सकते हैं। निर्माता CODE380 का D-Vision SDR वज़न में स्मार्टफोन से थोड़ा ही भारी है।

कई रूसी ड्रोन अपने कैमरे का वीडियो बिना एन्क्रिप्शन के भेजते हैं, इसलिए सही रिसीवर वाला कोई भी इसे पकड़ सकता है। इस उपकरण से यूक्रेनी यूनिट देख सकती है कि हमलावर ड्रोन किस ओर जा रहा है और उसका पायलट किसे निशाना बना रहा है। टकराने से पहले मिली यह जानकारी सैनिकों को आड़ लेने या साज़ो-सामान हटाने में मदद करती है।

कैसे काम करता है

Defense News के अनुसार D-Vision SDR एक सॉफ़्टवेयर-डिफ़ाइंड रेडियो है, यानी ज़्यादातर काम स्थायी हार्डवेयर के बजाय सॉफ़्टवेयर करता है। यह 500 मेगाहर्ट्ज़ से 8.7 गीगाहर्ट्ज़ तक की फ़्रीक्वेंसी स्कैन करता है और मिले सिग्नल को स्क्रीन पर वीडियो में बदल देता है। डेवलपर्स का दावा है कि यह पूरी रेंज बिना ब्लाइंड स्पॉट के स्कैन करता है और प्रतिस्पर्धी डिटेक्टरों से अधिक संवेदनशील है। रूस के ड्रोन स्पेसिफ़िकेशन बदलने पर इसे सॉफ़्टवेयर से अपडेट भी किया जा सकता है।

Militarnyi के आँकड़ों के मुताबिक 540 मेगाहर्ट्ज़ से 6 गीगाहर्ट्ज़ के बीच एनालॉग वीडियो के लिए इसकी रेंज 10 किलोमीटर तक है। ऊँची फ़्रीक्वेंसी पर यह 3.5 से 5 किलोमीटर रह जाती है। यह निष्क्रिय (पैसिव) है, यानी सिर्फ़ सुनता है और खुद कुछ प्रसारित नहीं करता।

लगभग 290 ग्राम वज़न इसकी सबसे बड़ी ताक़त है। Babai का Vydun 7.5 करीब 900 ग्राम, Contra-drone का SENSE-4 600 ग्राम और BlueBird Tech का Chuyka 3.0 अधिकतम 650 ग्राम का है। इसकी स्कैन रेंज में 4.1 से 4.5 गीगाहर्ट्ज़ का बैंड भी आता है, जिसे रूस के Molniya हमलावर ड्रोन ने जून से वीडियो के लिए इस्तेमाल करना शुरू किया।

सीमाएँ

यूक्रेन के राष्ट्रपति के सलाहकार और रेडियो विशेषज्ञ Serhii "Flash" Beskrestnov ने चेताया है कि डिजिटल वीडियो एनालॉग की जगह ले सकता है, जिससे पोर्टेबल डिटेक्टर बेअसर हो जाएँगे। डिजिटल प्रसारण को डिकोड करना भी कठिन है, और फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन हवा में कुछ भेजते ही नहीं। Defense News के मुताबिक रूस ऐसे ड्रोन बना रहा है जिनका वीडियो हैक करना मुश्किल है। New York Times ने अगस्त में बताया था कि कुछ Molniya AI-निर्देशित हैं, Nvidia चिप इस्तेमाल करते हैं और कोई सिग्नल नहीं छोड़ते।

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