दक्षिण कोरिया का PIPC साल के अंत तक AI युग के लिए निजता नियमों में बदलाव लाएगा
सार्वजनिक चर्चा में करीब 90% प्रतिभागियों ने बदलाव का समर्थन किया। अब दक्षिण कोरिया का निजता नियामक इसी वर्ष AI युग के लिए नई निजता व्यवस्था पेश करेगा।

दक्षिण कोरिया का व्यक्तिगत सूचना संरक्षण आयोग (PIPC) इसी वर्ष के भीतर AI युग के अनुरूप निजता व्यवस्था में सुधार की योजना तैयार करेगा। यह फैसला 1 नवंबर को योनसेई विश्वविद्यालय में हुई तीसरी 'सबके लिए चर्चा' (모두의 토론회) के नतीजों के बाद आया है, जिसमें करीब 90% नागरिक प्रतिभागियों ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में बदलाव ज़रूरी है।
सर्वे के नतीजे
आयोग के मुताबिक आवेदकों में से उम्र, लिंग और क्षेत्र को ध्यान में रखकर 195 लोग चुने गए। इनमें 10 से 60 साल से ऊपर तक के लोग और सियोल से जेजू तक के प्रतिभागी शामिल थे। मौके पर हुए सर्वे में 89.7% ने बदलाव की ज़रूरत बताई। इनमें 29.2% चाहते हैं कि ढांचा शुरू से नया बने, जबकि 60.5% का मत है कि ढांचा रहे और उसमें AI युग के नियम जोड़े जाएं।
चर्चा से पहले 15 से 29 अक्टूबर तक चले ऑनलाइन विमर्श में 1,333 लोगों ने हिस्सा लिया। 88% ने माना कि उन्होंने बार-बार मांगी गई सहमति को बस औपचारिकता में निपटाया है। 94% का कहना था कि आसान भाषा में पहले सूचना देना और कभी भी इनकार का अधिकार देना पूर्व-सहमति से ज़्यादा अहम है। 90% ने यह भी माना कि जिस डेटा के लीक होने पर नुकसान ज़्यादा हो, उस पर सख्ती और बाकी पर लचीलापन होना चाहिए।
विशेषज्ञों और समूहों की राय
चर्चा में 25 समूहों में से 20 (80%) ने 'पहले बताएं और कभी भी रोकने दें' मॉडल को चुना। उनका तर्क था कि हर बार सहमति लेना औपचारिकता बन जाता है और AI की सुविधा तथा आपात या सार्वजनिक उद्देश्य की त्वरित कार्रवाई में बाधा डाल सकता है, बशर्ते इनकार का अधिकार पक्का हो। चार समूहों (16%) ने डेटा लीक और दुरुपयोग की चिंता तथा AI व कंपनियों पर भरोसे की कमी के कारण 'हर बार पूर्व-सहमति' चुनी।
विशेषज्ञ प्रस्तुतियों में जेओनबुक राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर किम दो-सेउंग ने कहा कि सहमति की संख्या बढ़ाने भर से सुरक्षा मज़बूत नहीं होती। KAIST के प्रोफेसर किम ब्योंग-पिल ने AI एजेंट के माहौल में मौजूदा सहमति व्यवस्था की सीमाएं बताईं। सर्वे में 'कंपनियों की जोखिम जांच व सुरक्षा ज़िम्मेदारी' (75.4%) और 'सरकार द्वारा मानक बनाना व निगरानी' (74.9%) सबसे अहम भूमिकाएं चुनी गईं।
PIPC इन सुझावों को शामिल कर साल के अंत तक सुधार योजना तैयार करेगा। गृह एवं सुरक्षा मंत्रालय 26 नवंबर को चौथी चर्चा आयोजित करेगा, जिसका विषय समाज में किसी के अकेले न पड़ने के उपाय हैं।
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