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SEBI ने Atomberg के ₹450 करोड़ के IPO को दी मंजूरी

बाजार नियामक SEBI ने Atomberg के IPO को हरी झंडी दे दी है। इसमें ₹450 करोड़ तक का फ्रेश इश्यू और 7.65 करोड़ शेयरों की OFS शामिल है।

A modern Atomberg ceiling fan mounted on a living room ceiling, symbolising the appliance maker's planned stock market listing.
छवि: Inc42 Media

बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने कंज्यूमर अप्लायंसेज कंपनी Atomberg के IPO को मंजूरी दे दी है। नियामक ने 30 अक्टूबर को कंपनी को अपना ऑब्जर्वेशन लेटर जारी किया। यह पत्र कंपनी के ड्राफ्ट पेपर दाखिल करने के करीब दो महीने बाद आया है। SEBI की प्रक्रिया में यही पत्र पब्लिक ऑफर आगे बढ़ाने की औपचारिक अनुमति माना जाता है।

IPO की संरचना और पैसे का इस्तेमाल

DRHP के मुताबिक IPO में ₹450 करोड़ तक के इक्विटी शेयरों का फ्रेश इश्यू और 7.65 करोड़ इक्विटी शेयरों तक की ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल हो सकती है। कंपनी फ्रेश इश्यू से ₹90 करोड़ कुछ कर्जों के भुगतान या पूर्व-भुगतान में लगाएगी। ₹150 करोड़ ब्रांड जागरूकता और परफॉर्मेंस मार्केटिंग पर तथा ₹100 करोड़ रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर खर्च होंगे। बाकी रकम सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों के लिए रखी गई है।

A91 Partners, Temasek Holdings और Inflexor Ventures जैसे निवेशक IPO के जरिए अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेचना चाहते हैं।

कंपनी का कारोबार और वित्तीय स्थिति

Atomberg की स्थापना 2012 में मनोज मीणा ने की थी और 2013 में सिबब्रत दास सह-संस्थापक के रूप में जुड़े। कंपनी सीलिंग फैन, मिक्सर ग्राइंडर, वॉटर प्यूरीफायर और कोल्ड-प्रेस्ड जूसर बनाती है। सब्सिडियरी Atomberg Innovations के जरिए वह Voltas, Godrej और Blue Star जैसे एंटरप्राइज ग्राहकों को मोटर और कंट्रोलर जैसे अपने कंपोनेंट भी देती है।

वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 34.8% बढ़कर ₹1,293.77 करोड़ रहा, जो FY25 में ₹959.51 करोड़ था। हालांकि समेकित शुद्ध घाटा 26.8% बढ़कर ₹148.9 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल यह ₹117.4 करोड़ था।

31 मार्च 2026 तक कंपनी के पास 626 डिस्ट्रीब्यूटर और सीधे डीलर थे, जिनके जरिए करीब 1,600 शहरों-कस्बों में 46,932 रिटेल टचपॉइंट बने। इसका आफ्टर-सेल्स सर्विस नेटवर्क 18,000 से ज्यादा पिन कोड तक फैला है। FY26 में ऑफलाइन कंज्यूमर अप्लायंस रेवेन्यू में सबसे बड़ा हिस्सा टियर II और छोटे शहरों का रहा, 49.57%। मेट्रो शहरों की हिस्सेदारी 30.91% और टियर 1 की 19.52% रही।

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