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Z2RAM: गेल्सिंगर समर्थित मेमोरी से AI चिप संकट में राहत की आस

पूर्व Intel प्रमुख पैट गेल्सिंगर समर्थित Nagare Labs का दावा है कि Z2RAM में SRAM की गति, DRAM की डेंसिटी और NAND जैसी स्टैकिंग मिलती है।

Close-up of a memory chip on a circuit board beside stacked memory layers, illustrating the Z2RAM concept.
छवि: Hipertextual

सेमीकंडक्टर उद्योग महामारी के बाद के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। AI की तेज़ बढ़त ने मेमोरी की मांग को अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचा दिया है, जिससे किल्लत और कीमतों में उछाल आया है। इसकी मार स्मार्टफोन समेत सभी सेगमेंट पर पड़ी है। इसी बीच Z2RAM नाम की नई मेमोरी तकनीक सामने आई है, जिसे Intel के पूर्व प्रमुख पैट गेल्सिंगर का समर्थन मिला है।

Z2RAM को विकसित कर रही स्टार्टअप Nagare Labs का कहना है कि यह बाज़ार की तीन प्रमुख तकनीकों, यानी SRAM, DRAM और NAND, की खूबियों को एक साथ लाती है। SRAM बेहद तेज़ है और प्रोसेसर के कैश में इस्तेमाल होती है, पर जगह ज़्यादा घेरती है और महंगी पड़ती है। DRAM अधिक डेंसिटी देती है, लेकिन धीमी है। SSD में लगने वाली NAND अपनी क्षमता और कई परतों में वर्टिकल निर्माण के लिए जानी जाती है।

कैसे अलग है डिज़ाइन

पारंपरिक DRAM हर बिट के लिए एक ट्रांजिस्टर और एक कैपेसिटर का उपयोग करती है। Z2RAM में दो ट्रांजिस्टर होते हैं और दूसरे ट्रांजिस्टर के गेट की कैपेसिटेंस में चार्ज जमा होता है, इसलिए अलग कैपेसिटर की ज़रूरत नहीं पड़ती। कंपनी के अनुसार हर एक्सेस के बाद डेटा दोबारा लिखने की ज़रूरत भी नहीं होती, जो DRAM की एक सीमा है।

यह मेमोरी NAND की तरह वर्टिकल स्टैकिंग के लिए बनाई गई है और ऑक्साइड सेमीकंडक्टर तथा 3D हाइब्रिड बॉन्डिंग तकनीक का उपयोग करती है। Nagare Labs के मुताबिक यह SRAM की तुलना में पांच गुना से अधिक बिट डेंसिटी दे सकती है, जबकि बैंडविड्थ लगभग बराबर रहेगी। जितनी जगह में 64 MB SRAM आती है, उसमें 320 MB Z2RAM समा सकती है। कंपनी बिजली की खपत भी काफ़ी कम रहने का दावा करती है।

AI के लिए क्यों अहम

AI एक्सेलरेटरों में कंप्यूट के साथ डेटा को तेज़ी से लाने-ले जाने की क्षमता भी बड़ी बाधा है। प्रोसेसर के पास जितनी ज़्यादा तेज़ मेमोरी होगी, एडवांस्ड मॉडल चलाने के लिए उतने कम चिप लगेंगे। इससे सप्लाई चेन पर दबाव घट सकता है और कंपोनेंट की उपलब्धता बेहतर होकर कीमतें नीचे आ सकती हैं। हालांकि Z2RAM पारंपरिक मेमोरी की जगह नहीं लेगी।

फ़िलहाल तकनीक शुरुआती चरण में है। Nagare Labs के इंजीनियर शुरुआती प्रोटोटाइप बना चुके हैं, लेकिन व्यावसायिक उत्पादन में करीब एक दशक लग सकता है। कंपनी को भरोसेमंदी और इंटरफ़ेस के मानकीकरण से जुड़ी समस्याएं हल करनी हैं।

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