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रूस और यूक्रेन के अलर्ट ऐप हैक, यूज़र्स को भेजे गए फ़र्ज़ी परमाणु चेतावनी संदेश

रूस और यूक्रेन के हवाई हमले वाले अलर्ट ऐप रात में हैक हुए और यूज़र्स को झूठी परमाणु व रासायनिक चेतावनियाँ मिलीं। दोनों हमलों का संबंध साफ़ नहीं है।

Smartphone showing an emergency alert notification on screen, symbolizing hacked air raid warning apps in Russia and Ukraine.
छवि: MamStartup

रविवार से सोमवार की रात रूस और यूक्रेन के आधिकारिक अलर्ट ऐप साइबर हमलों का निशाना बने। दोनों देशों के यूज़र्स को परमाणु और रासायनिक ख़तरे के फ़र्ज़ी नोटिफ़िकेशन मिले। घटनाओं से बड़े पैमाने पर दहशत नहीं फैली और ये इंटरनेट पर ज़्यादातर मीम का विषय बन गईं। यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों देशों के हमले आपस में जुड़े हैं या नहीं।

यूक्रेन: ड्रोन ट्रैकिंग वाला ऐप निशाने पर

यूक्रेन का आधिकारिक एयर रेड अलर्ट ऐप हाल ही में अपडेट हुआ था, जिसमें रीयल-टाइम ड्रोन ट्रैकिंग का फ़ीचर जोड़ा गया। रविवार देर रात सिस्टम में सेंध लगी और यूज़र्स को परमाणु व रासायनिक अलर्ट के साथ कीव और अन्य इलाक़ों में सड़क पर लड़ाई के झूठे संदेश मिले। संदेशों में रूस की हाइपरसोनिक मिसाइल Oreshnik के कथित इस्तेमाल का भी ज़िक्र था।

यूक्रेनी वायु सेना ने Telegram पर तुरंत खंडन किया, कहा कि विकिरण का कोई ख़तरा नहीं है और लोगों से शांत रहने की अपील की। Air Raid Alert प्रोजेक्ट के प्रमुख Stepan Tanasiychuk के अनुसार ऐप को चरणों में पूरी तरह बहाल किया जा रहा है। टीम ने भविष्य में ऐसी घटनाएँ रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए हैं और अनावश्यक चिंता के लिए माफ़ी माँगी है। CNN की रिपोर्ट के हवाले से यह जानकारी सामने आई।

रूस: 33 क्षेत्रों में फ़र्ज़ी अलर्ट

सरकारी समाचार एजेंसी TASS के मुताबिक़ रूस के आपातकालीन मंत्रालय (Emercom) का मोबाइल ऐप बड़े साइबर हमले की चपेट में आया। 33 क्षेत्रों में भेजे गए फ़र्ज़ी अलर्ट में दावा था कि पूरे रूसी क्षेत्र पर परमाणु हथियार दाग दिए गए हैं, साथ में अपशब्दों वाली चेतावनी भी जुड़ी थी।

मंत्रालय का कहना है कि ऐप अब चालू है और उसकी पूरी कार्यक्षमता दिन के अंत तक बहाल होनी थी। विशेषज्ञों ने घटना की जाँच कर वह कमज़ोरी पहचान ली है जिसका हमलावरों ने फ़ायदा उठाया। मंत्रालय ने घटना को ज़्यादा तूल न देते हुए याद दिलाया कि आधिकारिक चेतावनियाँ सायरन, SMS और मीडिया के ज़रिए भी दी जाती हैं। क्रेमलिन प्रवक्ता Dmitry Peskov ने कहा कि सरकारी एजेंसियों के इलेक्ट्रॉनिक संसाधनों पर साइबर हमलों का दबाव लगातार रहता है और तकनीक व AI के विकास के साथ यह ख़तरा बढ़ रहा है।

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