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Regenephro ने J-KISS से जुटाए ¥1.7 अरब, iPS किडनी थेरेपी पर दांव

क्योटो की Regenephro ने J-KISS नोट्स से ¥1.7 अरब जुटाए। कंपनी किडनी दवा RN-014 के लिए फार्मा पार्टनर खोज रही है, इसलिए वैल्यूएशन टाल दिया गया।

Researchers working in a laboratory on iPS cell-derived kidney regeneration therapy at a Kyoto biotech startup.
छवि: BRIDGE

क्योटो की बायोटेक स्टार्टअप Regenephro ने J-KISS के ज़रिये ¥1.7 अरब जुटाए हैं। J-KISS ऐसा नया शेयर वारंट (न्यू शेयर रिज़र्वेशन राइट) है, जिसमें निवेश के समय कंपनी की कीमत तय नहीं होती। अगली बार शेयर जारी कर फंड जुटाने पर जो भाव तय होगा, उसी के आधार पर यह नोट शेयर में बदल जाता है।

वैल्यूएशन टालने की वजह

CFO कात्सुहिसा यामागुची के मुताबिक कंपनी की मुख्य दवा RN-014, किडनी रोगों के लिए बनी एक छोटे अणु (small molecule) वाली दवा है, और उसके लिए फार्मा कंपनी के साथ साझेदारी की बातचीत चल रही है। सौदा हुआ तो कंपनी की वैल्यू तेज़ी से बढ़ सकती है, इसलिए अभी शेयर का भाव तय करना जल्दबाज़ी माना गया। आम तौर पर J-KISS सीड चरण में इस्तेमाल होता है और रकम कुछ करोड़ येन से एक-दो अरब येन तक रहती है।

Regenephro 2019 में बनी। इसकी बुनियाद क्योटो यूनिवर्सिटी के CiRA के प्रोफेसर केंजी ओसाफुने का 20 साल का किडनी रीजनरेशन शोध है। कंपनी iPS कोशिकाओं से बनी नेफ्रॉन प्रोजेनिटर कोशिकाओं के प्रत्यारोपण से किडनी की गिरावट और फाइब्रोसिस रोकना चाहती है। RN-014 फेज़ 2a ट्रायल पूरा कर चुकी है, जबकि अगली थेरेपी RN-032 नॉन-क्लिनिकल ट्रायल से पहले की प्रोसेस डेवलपमेंट पूरी कर चुकी है।

सफलता की दर और राजस्व

CEO अयाफुमी मorinaka ने निजी राय के तौर पर बताया कि नॉन-क्लिनिकल ट्रायल और फेज़ 1 की सफलता दर 60–70% के आसपास होती है, जबकि इंसानों पर असर परखने वाला फेज़ 2 करीब 30–40% रहता है। कंपनी बनाकर किसी तरह के एग्ज़िट तक पहुंचने वाले मामले 10–20% ही हैं।

दवा आने तक बेचने को कुछ नहीं होता। बड़ी फार्मा कंपनियों से संयुक्त शोध की आय को कंपनी राजस्व नहीं, बल्कि “अन्य आय” मानती है, पर ऐसी साझेदारी तकनीकी क्षमता का प्रमाण है। मोरिनाका के अनुसार AI से दवा डिज़ाइन तेज़ हो सकता है, पर इंसानों पर क्लिनिकल ट्रायल के कई साल कम करना मुश्किल है।

मोरिनाका 2020 में Jafco की ओर से निवेश कर चुके हैं और 2023 में कंपनी के अध्यक्ष बने। उनके मुताबिक अब अनुभवी पेशेवर भी ऐसी कंपनियों में आ रहे हैं, क्योंकि वेतन बढ़ा है और स्टॉक ऑप्शन न्यूनतम शर्त बन गए हैं।

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