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Oak Ridge में IBM-AMD क्वांटम-HPC टेस्टबेड, एरर करेक्शन पर फोकस

Oak Ridge National Laboratory ने IBM के क्वांटम प्रोसेसर और AMD आधारित सुपरकंप्यूटर को जोड़कर क्वांटम एरर करेक्शन के शोध के लिए नया प्लेटफ़ॉर्म पेश किया है।

Rows of server racks in a supercomputing facility next to a cryogenic quantum computer housing at a national laboratory.
छवि: theregister

अमेरिका की Oak Ridge National Laboratory (ORNL) ने क्वांटम एरर करेक्शन पर शोध के लिए एक नया सिस्टम पेश किया है। इसमें IBM के क्वांटम प्रोसेसर को AMD चिप पर आधारित हाई-परफ़ॉर्मेंस कंप्यूटिंग (HPC) सिस्टम के साथ जोड़ा गया है।

अमेरिकी ऊर्जा विभाग (DoE) से वित्तपोषित ORNL के Quantum Science Center (QSC) ने इसे क्वांटम एरर करेक्शन के लिए "को-डिज़ाइन प्लेटफ़ॉर्म" कहा है। ORNL के अनुसार, फ़ॉल्ट-टॉलरेंट क्वांटम सिस्टम भले ही हमेशा कम से कम एक दशक दूर लगते हों, पर पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। इनमें क्वांटम जानकारी को पर्यावरणीय शोर से बचाने के शुरुआती प्रदर्शन शामिल हैं, क्योंकि यही शोर गणना के लिए ज़रूरी नाज़ुक क्वांटम अवस्थाओं को नष्ट कर सकता है।

सिस्टम में क्या-क्या है

प्लेटफ़ॉर्म में IBM Quantum System Two है, जिसमें 120 क्यूबिट वाले नवीनतम Nighthawk r2 क्वांटम प्रोसेसर लगे हैं। इसके साथ Umbra नाम का क्लासिकल HPC सिस्टम है, जो AMD के 5th Gen Epyc CPU और Instinct MI355X GPU एक्सेलरेटर पर चलता है। AMD के मुताबिक CPU पूरे सिस्टम के समन्वय और सामान्य प्रदर्शन का काम संभालते हैं, जबकि GPU सिमुलेशन, ऑप्टिमाइज़ेशन और क्वांटम वर्कलोड के आसपास की समानांतर वैज्ञानिक गणनाओं को तेज़ करते हैं। क्वांटम सर्किट के लिए कम लेटेंसी वाले कंट्रोल, रीडआउट और डिकोडिंग का काम AMD Versal SoC करते हैं।

QSC निदेशक Travis Humble ने कहा कि एरर करेक्शन की चुनौतियों को हल करना क्वांटम कंप्यूटिंग को वैज्ञानिक खोज का व्यावहारिक औज़ार बनाने के लिए ज़रूरी है। IBM Research के निदेशक Jay Gambetta के अनुसार सवाल अब यह नहीं कि एरर करेक्शन काम करता है या नहीं, बल्कि यह है कि उसे कैसे तेज़ और बेहतर बनाया जाए।

आगे क्या

IBM के मुताबिक एक संभावित तरीका हाइरार्किकल एरर करेक्शन है, जिसमें मॉड्यूल के भीतर क्यूबिट की सुरक्षा के लिए इनर कोड और उसके लॉजिकल क्यूबिट के ऊपर दूसरी परत के रूप में आउटर कोड लगाया जाता है। IBM के शोध का अनुमान है कि यह तरीका एक हज़ार में एक की फ़िज़िकल एरर रेट पर एक ट्रिलियन लॉजिकल ऑपरेशन तक पहुँच सकता है।

यह प्लेटफ़ॉर्म DoE के Quantum Genesis Mission के लक्ष्यों में अहम भूमिका निभा सकता है। इनमें हाल ही में घोषित Q Competition भी है, जिसका उद्देश्य 100 लॉजिकल क्यूबिट वाला ऐसा सिस्टम तैयार करना है जो करोड़ों फ़ॉल्ट-टॉलरेंट ऑपरेशन कर सके।

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