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NASA का Competition Model 2.0: मिशन चयन अब 19.5 महीने में

NASA के नए Competition Model 2.0 से Discovery और New Frontiers जैसे मिशनों का चयन 35 से घटकर करीब 19.5 महीने में होगा और प्रस्तावों का काग़ज़ी बोझ घटेगा।

NASA science spacecraft concept above a planet, illustrating faster mission selection under the new Competition Model 2.0.
छवि: Spider's Web

NASA ने विज्ञान मिशनों के चयन की प्रक्रिया बदलते हुए Competition Model 2.0 की घोषणा की है। एजेंसी के अनुसार कुछ कार्यक्रमों में चयन का समय 35 महीने से घटकर लगभग 19.5 महीने रह जाएगा, यानी करीब 45 प्रतिशत की कमी। छोटे मिशनों के लिए प्रक्रिया और भी सरल की जा रही है।

पुरानी प्रक्रिया में क्या दिक्कत थी

अब तक किसी वैज्ञानिक टीम को अपना मिशन आगे बढ़ाने के लिए शुरुआती चरण में ही विस्तृत तकनीकी योजना, समय-सारणी, लागत और संगठनात्मक ढांचा पेश करना पड़ता था। इस दस्तावेज़ी काम में कई विशेषज्ञ महीनों लगे रहते थे, जबकि ज़्यादातर प्रस्तावों को अंत में फंडिंग नहीं मिलती थी।

21 अक्टूबर को वैज्ञानिक समुदाय को लिखे पत्र में NASA के Science Mission Directorate की प्रमुख Nicola Fox ने माना कि मौजूदा व्यवस्था जटिल और अनिश्चित थी। NASA के नए प्रशासक Jared Isaacman ने फ़ैसले तेज़ करने वाला समाधान तैयार करने को कहा था।

दो चरण बरकरार, पर हल्का पहला चरण

बदलाव का सबसे बड़ा असर Astro-Probes, New Frontiers और Discovery कार्यक्रमों पर पड़ेगा। प्रक्रिया दो चरणों की ही रहेगी, लेकिन पहले चरण में टीमों को मुख्यतः वैज्ञानिक औचित्य, शोध की योजना और प्रारंभिक तकनीकी अवधारणा देनी होगी। NASA का अनुमान है कि इससे शुरुआती दस्तावेज़ों की मात्रा लगभग आधी हो जाएगी।

व्यवहार्यता की गहरी जांच बाद में चुने गए प्रस्तावों की होगी। इसमें Goddard Space Flight Center और Jet Propulsion Laboratory की अहम भूमिका रहेगी। कुछ Discovery और New Frontiers परियोजनाओं में Goddard की निगरानी में Johns Hopkins Applied Physics Laboratory भी शामिल हो सकती है। NASA का कहना है कि इससे बड़े संसाधनों के बिना छोटी टीमें भी शोध की गुणवत्ता के आधार पर प्रतिस्पर्धा कर सकेंगी। MIDEX और Earth Explorer के लिए भी ऐसा ही मॉडल होगा।

छोटे मिशन और सख़्त लागत नियंत्रण

SMEX, Earth Venture, Missions of Opportunity और अन्य यानों पर अतिरिक्त पेलोड के रूप में जाने वाली परियोजनाओं के लिए एक चरण वाला मॉडल होगा। इसमें समीक्षकों के छोटे दल और दूरस्थ निरीक्षण होंगे, और अंतिम चयन का समय लगभग 32 से घटकर 19 महीने (करीब 40 प्रतिशत कम) हो सकता है। भविष्य के प्रतियोगिताओं में तैयार व्यावसायिक सैटेलाइट प्लेटफ़ॉर्म और सेवाओं को भी अधिक महत्व मिलेगा।

साथ ही NASA लागत और समय-सीमा पर नियंत्रण कड़ा करेगा। तय सीमा लांघने वाली परियोजनाओं की फंडिंग पूरी तरह बंद भी की जा सकती है। चयन तेज़ होने का मतलब यह नहीं कि यान उतनी ही जल्दी बनकर लॉन्च भी होंगे।

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