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Magnons उम्मीद से ज़्यादा टिकाऊ, spintronics को मिली नई रफ़्तार

Paul Scherrer Institute के शोधकर्ताओं ने पाया कि magnons अपनी ऊर्जा अनुमान से कहीं ज़्यादा देर तक बनाए रखते हैं। यह कम बिजली वाले कंप्यूटिंग के लिए अहम है।

Illustration of magnetic spin waves travelling through a crystal lattice struck by a laser pulse.
छवि: CHIP Polska - Technologie mamy we krwi!

स्विट्ज़रलैंड के Paul Scherrer Institute के वैज्ञानिकों ने पाया है कि magnons, यानी स्पिन तरंगों के क्वांटम उत्तेजन, अपनी ऊर्जा अब तक माने जाने से काफ़ी लंबे समय तक बनाए रखते हैं। यह खोज spintronics के विकास के लिए बड़ा मौका मानी जा रही है। इसके नतीजे Nature Communications में प्रकाशित हुए हैं।

पारंपरिक चिप्स की सीमा

आज के प्रोसेसर सर्किट में विद्युत आवेश के प्रवाह पर चलते हैं। इससे बेहद सक्षम उपकरण बने, लेकिन करंट के बहाव में ऊर्जा गर्मी के रूप में बर्बाद होती है। साथ ही ट्रांज़िस्टर को और छोटा करना भी कठिन होता जा रहा है। Spintronics इसका एक विकल्प है, जो इलेक्ट्रॉन के आवेश के साथ उनके स्पिन, यानी चुंबकीय आघूर्ण से जुड़े क्वांटम गुण, का भी उपयोग करती है।

जब किसी पदार्थ में इलेक्ट्रॉनों के स्पिन समन्वित ढंग से गति करते हैं, तो स्पिन तरंगें बनती हैं। उनके क्वांटम उत्तेजन को magnons कहा जाता है। वे इलेक्ट्रॉनों को हिलाए बिना ऊर्जा और सूचना को पदार्थ में आगे ले जा सकते हैं।

प्रयोग में क्या दिखा

टीम ने कॉपर ऑक्साइड का उपयोग किया, जिसमें चुंबकत्व और परमाणुओं के कंपन के बीच मज़बूत अंतःक्रिया होती है। नमूने पर बेहद छोटा और तीव्र लेज़र पल्स डाला गया। इससे इलेक्ट्रॉन उत्तेजित हुए, उनके स्पिन बदले और magnons बने। यह प्रक्रिया फ़ेम्टोसेकंड के पैमाने पर हुई।

इसके बाद चुंबकीय उत्तेजन आपस में क्रिया करके कहीं अधिक अव्यवस्थित तरंग-व्यवस्था बनाने लगे। उसके बाद ही उन्होंने क्रिस्टल संरचना के परमाणुओं के कंपन, यानी phonons, को ऊर्जा दी। सबसे अहम बात यही अंतिम चरण थी: magnons से phonons तक ऊर्जा का हस्तांतरण नैनोसेकंड के पैमाने पर हुआ, जो शोधकर्ताओं की अपेक्षा से काफ़ी लंबा है।

इसे पकड़ने के लिए फ़्री-इलेक्ट्रॉन लेज़र के तीव्र एक्स-रे पल्स, pump-probe तकनीक और समय-विभेदित रेज़ोनेंट स्कैटरिंग के नए उपयोग को मिलाया गया।

आगे क्या

शोधकर्ताओं के अनुसार magnons और phonons के ऊर्जा-संवेग संबंधों में अंतर ऊर्जा हस्तांतरण को सीमित करता है। इस तंत्र की बेहतर समझ से ऐसे पदार्थ डिज़ाइन किए जा सकते हैं जिनमें magnons का जीवनकाल नियंत्रित हो। भविष्य में यह कम बिजली वाले लॉजिक सर्किट, spintronic उपकरणों और नए कंप्यूटिंग आर्किटेक्चर में काम आ सकता है।

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