जापान ने कंपनियों को चेताया: बुनियादी सुरक्षा की कमी से डेटा लीक
जापान के नेशनल साइबर ऑफिस ने डेटा लीक की घटनाओं के बाद एडवाइजरी जारी की है। उसने बुनियादी सुरक्षा की कमी और हमलावरों द्वारा AI के संभावित इस्तेमाल की ओर इशारा किया।

जापान के कैबिनेट सचिवालय के अंतर्गत आने वाले नेशनल साइबर ऑफिस (国家サイバー統括室) ने 5 नवंबर को वेबसाइट और मोबाइल ऐप चलाने वाली कंपनियों के लिए एडवाइजरी जारी की। देश में निजी जानकारी लीक होने की लगातार घटनाओं के बाद जारी इस चेतावनी में कहा गया है कि कई मामलों में कारण “बुनियादी सुरक्षा उपायों की कमी” प्रतीत होता है।
ऑफिस के मुताबिक हमलावर इंटरनेट पर वेबसाइटों को बड़े पैमाने पर स्कैन करते हैं, घुसपैठ लायक सिस्टम ढूंढते हैं और फिर निजी डेटा चुराते हैं। ऐसे लक्ष्य खोजने और घुसपैठ में AI के इस्तेमाल की संभावना अधिक मानी गई है। पारंपरिक वल्नरेबिलिटी जांच में कम जोखिम वाली आंकी गई कई खामियों को जोड़कर सिस्टम में सेंध लगाई जा रही है, जिससे हमले बड़े पैमाने पर आसान हो गए हैं और अब व्यापक श्रेणी की कंपनियां निशाने पर हैं।
कंपनियों की ओर से भी मोबाइल ऐप विकास में सुरक्षा की कमी, वेबसाइट की गलत कॉन्फ़िगरेशन, और सपोर्ट खत्म हो चुके या ज्ञात खामियों वाले सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल जारी रखने जैसी चूकें सामने आई हैं।
तीन क्षेत्रों में सुझाए गए उपाय
पहला क्षेत्र सिस्टम के संचालन और प्रबंधन का है। कंपनियों से कहा गया है कि वे इस्तेमाल हो रहे सॉफ़्टवेयर और उसकी खामियों की जानकारी रखें और कार्रवाई की प्राथमिकता व समय-सीमा तय करें। आसान पासवर्ड या ब्रूट-फोर्स हमले से खुले एडमिन पैनल में सेंध के उदाहरण देते हुए गैर-जरूरी एडमिन पैनल और फ़ीचर सार्वजनिक न करने को कहा गया है। साथ ही AI आदि की मदद से लगातार वल्नरेबिलिटी जांच और लॉग विश्लेषण से संदिग्ध गतिविधि की निगरानी की सलाह दी गई है।
दूसरा क्षेत्र डिज़ाइन और विकास का है। शुरुआत से ही सुरक्षा को ध्यान में रखने वाले “सिक्योरिटी-बाय-डिज़ाइन” पर जोर है। सार्वजनिक ऐप के विश्लेषण से API के जरिए गलत तरीके से जानकारी निकालने के मामले मिले हैं, इसलिए एक्सेस प्रतिबंध और क्रेडेंशियल के उचित प्रबंधन की मांग की गई है। निजी डेटा संभालने वाले सिस्टम के लिए लॉन्च से पहले वल्नरेबिलिटी जांच की सिफारिश है।
तीसरा क्षेत्र आपूर्ति श्रृंखला का है। कई बार ठेकेदार या मेंटेनेंस कंपनी के वातावरण से मूल कंपनी में घुसपैठ होती है। इसलिए VPN और रिमोट डेस्कटॉप जैसे कनेक्शन मार्गों की पहचान कर मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन लगाने को कहा गया है। OSS और बाहरी लाइब्रेरी में गंभीर खामी घोषित होने पर शुरुआती कार्रवाई की प्रक्रिया पहले से तय रखनी चाहिए।
ऑफिस ने 9 अक्टूबर को भी पैच जल्दी लगाने और मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जैसे संगठन-व्यापी बुनियादी उपायों पर एडवाइजरी जारी की थी। इस बार दायरा वेबसाइट और मोबाइल ऐप के संचालन व विकास तक बढ़ाया गया है।
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