Cosmoserve को $6 मिलियन की सीड फंडिंग, 2028 तक कमर्शियल सेवा का लक्ष्य
भारतीय स्पेसटेक स्टार्टअप Cosmoserve ने Rebright Partners की अगुवाई में $6 मिलियन जुटाए हैं और हैदराबाद में Base 1 शुरू किया है। कंपनी 2028 तक कमर्शियल सेवाएं शुरू करना चाहती है।

भारतीय स्पेसटेक स्टार्टअप Cosmoserve Space ने सीड फंडिंग राउंड में $6 मिलियन जुटाए हैं। इस राउंड की अगुवाई जापान की Rebright Partners ने की। इसी के साथ कंपनी ने हैदराबाद में अंतरिक्ष मलबा हटाने की भारत की पहली निजी सुविधा 'Base 1' का उद्घाटन किया।
निवेशक और फंड का इस्तेमाल
राउंड में Aranya Holdings और Naandi Ventures ने भी हिस्सा लिया, जबकि मौजूदा निवेशक AUM Ventures और Shakti VC ने अपना निवेश बढ़ाया। कंपनी इस पूंजी का उपयोग तकनीकी प्रदर्शनों, दो आगामी मिशनों और हैदराबाद सुविधा के संचालन को मजबूत करने में करेगी। स्थापना के बाद से Cosmoserve कुल $9 मिलियन से ज्यादा जुटा चुकी है। संस्थापक चिरंजीवी फणींद्र के मुताबिक सितंबर के प्री-सीड राउंड के मुकाबले कंपनी का वैल्यूएशन दोगुना हुआ है, हालांकि सटीक आंकड़ा सामने नहीं आया है।
Cosmoserve ऐसी तकनीक बना रही है जो निष्क्रिय सैटेलाइट और ऑर्बिटल मलबे को हटाकर सक्रिय अंतरिक्ष यानों के टकराव का जोखिम घटाए। लागत कम रखने के लिए यान में ऑर्बिट में ही रीफ्यूलिंग की सुविधा होगी, ताकि एक मिशन में कई मलबे हटाए जा सकें।
पहले मिशन की चूक और आगे की राह
कंपनी का पहला प्रदर्शन मिशन Embrace-1 Skyroot Aerospace के Vikram-1 रॉकेट पर गया था। इसमें सॉफ्ट रोबोटिक कैप्चर सिस्टम की पंखुड़ियां अपेक्षा के अनुसार नहीं खुलीं। फणींद्र का कहना है कि पंखुड़ियां छोड़ने वाले थर्मल मैकेनिज्म और कम तापमान के असर से जुड़ी समस्याओं की पहचान कर उन्हें दूर किया गया है। अब आने वाले महीनों में अपग्रेडेड मिशन Embrace-2 लॉन्च होगा। कंपनी एक पूर्ण पैमाने के प्रदर्शन की भी योजना बना रही है, जिसमें किसी निष्क्रिय सैटेलाइट के 10 मीटर के भीतर पहुंचकर विश्व रिकॉर्ड बनाने का लक्ष्य है।
इसरो में करीब 15 साल काम कर चुके फणींद्र ने जून 2025 में Cosmoserve शुरू की थी। उन्हें उम्मीद है कि सभी टेक डेमो 2027 तक पूरे हो जाएंगे और 2028 तक कमर्शियल संचालन शुरू होगा। उनके अनुसार अमेरिका, यूरोप और भारत (दो) के सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन ऑपरेटरों से कंपनी के पास चार लेटर ऑफ इंटेंट हैं, और कमर्शियल संचालन से पहले एक पेड ग्राहक जोड़ने का लक्ष्य है।
Base 1 में क्या है
फणींद्र के अनुसार Base 1 भारत की पहली निजी और दुनिया की छठी ऐसी सुविधा है जिसमें स्पेस विजन इफेक्ट्स और माइक्रोग्रैविटी सिमुलेशन है। इसमें ऑर्बिटल रेंडेवू और कैप्चर लैब, ISO Class 8 क्लीन रूम, मिशन कंट्रोल सेंटर और माइक्रोग्रैविटी सिमुलेशन प्लेटफॉर्म है। इसे बनाने में करीब ₹6 करोड़ खर्च हुए। कंपनी यहां अहम तकनीकें खुद विकसित कर स्थानीय निर्माण का हिस्सा 60% से आगे बढ़ाना और ऑप्टिक्स, एवियोनिक्स जैसे आयातित पुर्जों पर निर्भरता घटाना चाहती है।
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