Indrajaal का राजस्व FY26 में ₹100 करोड़ पहुंचा, लक्ष्य ₹300 करोड़
हैदराबाद की डिफेंस-टेक स्टार्टअप Indrajaal का राजस्व FY26 में ₹34 करोड़ से बढ़कर ₹100 करोड़ हो गया। कंपनी ₹420 करोड़ का Series A जुटाने की तैयारी में है।

हैदराबाद की डिफेंस-टेक स्टार्टअप Indrajaal का राजस्व FY25 के करीब ₹34 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹100 करोड़ हो गया है। कंपनी ने चालू वित्त वर्ष (FY27) के लिए ₹300 करोड़ से ज़्यादा का लक्ष्य रखा है। साथ ही वह ₹420 करोड़ का Series A जुटाने की योजना बना रही है।
ड्रोन खतरे से शुरू हुआ सफ़र
सितंबर 2019 में हूती विद्रोहियों के सस्ते ड्रोन के झुंड ने Saudi Aramco की तेल प्रसंस्करण सुविधाओं पर हमला किया था। इससे सऊदी अरब का लगभग आधा तेल उत्पादन ठप हो गया। संस्थापक Kiran Raju ने भारत की सीमाओं पर बढ़ती ड्रोन घुसपैठ को देखकर अनुमान लगाया कि सुरक्षा एजेंसियों को शत्रु ड्रोन पहचानने और रोकने की तकनीक की ज़रूरत पड़ेगी। Carnegie Mellon University से पढ़े Raju ने 2006 में Grene Robotics शुरू की थी, जिससे अलग करके Indrajaal बनाई गई। कंपनी की स्थापना 2020 में हुई और अब तक उसने India Accelerator और Finvolve जैसे निवेशकों से करीब $5.5 मिलियन जुटाए हैं।
SkyOS, Ranger और SkyCop
पारंपरिक काउंटर-ड्रोन सिस्टम आमतौर पर अलग-अलग तकनीकों से ड्रोन को जाम करते या मार गिराते हैं। जब अपने और शत्रु ड्रोन एक ही हवाई क्षेत्र में उड़ रहे हों, तो यह तरीका कम असरदार रहता है। Indrajaal का AI प्लेटफ़ॉर्म SkyOS रडार, रेडियो-फ़्रीक्वेंसी सेंसर और कैमरों के रियल-टाइम डेटा से खतरों का पता लगाता है और उन्हें ट्रैक करता है। फिर वह जवाबी कार्रवाई सुझा सकता है या खुद कर सकता है।
कंपनी का मोबाइल काउंटर-ड्रोन वाहन Ranger चलते-चलते खतरे को पहचानकर निष्क्रिय कर सकता है। इसमें सिग्नल जाम करना, Repulsor से नेविगेशन में बाधा डालना या स्वायत्त इंटरसेप्टर ड्रोन SkyCop तैनात करना शामिल है। सिस्टम भारतीय सेना, नौसेना और गृह मंत्रालय के अधीन एजेंसियों के अहम ठिकानों पर लगाए जा चुके हैं। कंपनी हार्डवेयर, सॉफ़्टवेयर, इंस्टॉलेशन और दीर्घकालिक रखरखाव से कमाई करती है।
आगे की योजना
कंपनी विनिर्माण क्षमता और R&D बढ़ाने, मध्य-पूर्व और यूरोप के बाज़ारों में उतरने और कर्मचारियों की संख्या करीब 100 से लगभग 160 करने की योजना बना रही है। उसका लक्ष्य नागरिक ड्रोन कॉरिडोर और स्वायत्त हवाई परिवहन को सहारा देने वाला व्यापक स्वायत्त हवाई क्षेत्र इकोसिस्टम तैयार करना है।
चुनौतियां भी हैं। सरकारी अनुबंधों में लंबी सत्यापन अवधि और कई साल के सेल्स साइकिल होते हैं, जिससे वर्किंग कैपिटल पर दबाव पड़ सकता है। कस्टमाइज़्ड मॉडल से ग्रॉस मार्जिन पर असर पड़ सकता है, और वैश्विक व घरेलू प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। निजी उद्यमों तक पहुंच और विदेशी विस्तार की सफलता कंपनी की रफ़्तार तय करेगी।
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