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EG-CERT की चेतावनी: सोशल मीडिया पर लोकेशन शेयर करना जोखिम भरा

मिस्र की साइबर इमरजेंसी टीम EG-CERT ने जागरूकता अभियान शुरू किया है। उसने कहा कि सोशल मीडिया और ऐप्स पर लोकेशन साझा करने से रोज़ की दिनचर्या और घर की जानकारी उजागर हो सकती है।

A smartphone showing a map location pin above social media icons, illustrating the privacy risks of sharing your location online.
छवि: اليوم السابع

मिस्र की कंप्यूटर और नेटवर्क इमरजेंसी रेडीनेस टीम EG-CERT ने सोशल मीडिया और ऐप्स पर भौगोलिक लोकेशन साझा करने के जोखिमों को लेकर चेतावनी जारी की है। यह टीम राष्ट्रीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण से जुड़ी है। उसने यूज़र्स से अपना निजी डेटा सुरक्षित रखने और अपनी मौजूदगी व आवाजाही को सार्वजनिक न करने की अपील की है।

"आपकी लोकेशन आपकी प्राइवेसी है"

इस जागरूकता अभियान का नारा है "मौकेअक.. खुसूसिय्यतक.. मतकशفهوش लि-अय्य हद", यानी आपकी लोकेशन आपकी प्राइवेसी है, इसे किसी के सामने उजागर न करें। अभियान में खास तौर पर फ़ोटो पोस्ट करते समय लोकेशन टैग करने और किसी जगह "चेक-इन" करने पर ध्यान देने को कहा गया है।

अभियान के अनुसार बार-बार लोकेशन साझा करने से दूसरे लोग यूज़र की गतिविधियों पर नज़र रख सकते हैं। वे जान सकते हैं कि यूज़र कौन-सी जगहों पर जाता है और वहाँ कब होता है। इससे सुरक्षा जोखिम पैदा हो सकते हैं। इस जानकारी का इस्तेमाल यूज़र को निशाना बनाने में हो सकता है, या यह पता लगाने में कि उसका घर कब खाली रहता है।

बचाव के लिए क्या करें

EG-CERT ने मोबाइल फ़ोन में इंस्टॉल ऐप्स की परमिशन जाँचने की सलाह दी है। यूज़र को देखना चाहिए कि किन ऐप्स को लोकेशन का एक्सेस मिला हुआ है। जिन ऐप्स को इसकी ज़रूरत नहीं, उनके लिए यह फ़ीचर बंद कर देना चाहिए। लोकेशन की अनुमति केवल उन्हीं ऐप्स को दी जाए जिन्हें अपना काम करने के लिए यह चाहिए।

अभियान ने सार्वजनिक जगहों पर होते हुए सीधे लाइव लोकेशन पोस्ट करने से बचने को भी कहा है। फ़ोटो और पोस्ट साझा करते समय प्राइवेसी सेटिंग्स पर ध्यान देना भी ज़रूरी बताया गया है, ताकि प्रकाशित जानकारी से यूज़र की आवाजाही और रोज़मर्रा की आदतों का अंदाज़ा लगाना मुश्किल हो।

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