डेटा सेंटर और बिजली बिल: अमेरिकी मध्यावधि चुनाव का बड़ा मुद्दा
2024 के बाद अमेरिका में घरेलू बिजली की कीमतें 10% से ज़्यादा बढ़ी हैं। डेटा सेंटरों के विस्तार ने बिजली बिल को मध्यावधि चुनाव का केंद्रीय मुद्दा बना दिया है।

अमेरिका में बिजली का बिल अब सिर्फ़ घरेलू खर्च का हिस्सा नहीं रहा, बल्कि इस साल के मध्यावधि चुनाव का अहम राजनीतिक मुद्दा बन गया है। ऊर्जा की बढ़ती लागत से लोगों की नाराज़गी बढ़ रही है और सवाल उठ रहे हैं कि विशाल डेटा सेंटर बिजली की कीमतों को कितना प्रभावित कर रहे हैं।
अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप के 2024 में राष्ट्रपति चुने जाने के बाद से देश भर में घरेलू बिजली की कीमतें 10% से ज़्यादा बढ़ी हैं, जो अन्य वस्तुओं और सेवाओं की महंगाई से अधिक है। ओहायो, मिशिगन और पेंसिल्वेनिया में कुछ जगहों पर बिल महंगाई दर के तीन गुना से भी ज़्यादा बढ़े हैं। ये राज्य डेटा सेंटर परियोजनाओं के प्रमुख ठिकाने भी हैं।
उम्मीदवारों के वादे
ओहायो में डेमोक्रेटिक गवर्नर उम्मीदवार एमी एक्टन ने बिल घटाने, बिजली कंपनियों के प्रभाव से मुक्त उपयोगिता आयोग बनाने और नए डेटा सेंटरों पर रोक का समर्थन किया है। रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी विवेक रामास्वामी ने वादा किया है कि डेटा सेंटरों के आसपास रहने वालों पर बिजली का बोझ नहीं डाला जाएगा। राज्य में आवासीय बिल दो साल में 20% से अधिक बढ़े हैं।
पेंसिल्वेनिया के गवर्नर जोश शापिरो ने अप्रैल में बताया कि PECO Energy उनके कहने पर दर बढ़ाने का अनुरोध वापस लेने को राज़ी हुई, जिससे भविष्य के बिल में महीने के 34 डॉलर तक की बचत होगी। पिछले साल न्यू जर्सी में मिकी शेरिल ने बिल फ्रीज़ करने के वादे पर जीत हासिल की और पद संभालते ही उसे लागू किया। वर्जीनिया में भी गवर्नर एबिगेल स्पैनबर्गर ने ऐसा ही रास्ता अपनाया।
उद्योग की चिंता
Power Lines के सर्वे के अनुसार, बिजली कंपनियां इस साल 31 अरब डॉलर की दर वृद्धि मांगने जा रही हैं, जो पिछले साल के रिकॉर्ड के बराबर है। S&P Global के विश्लेषण में निवेशक-स्वामित्व वाली कंपनियां अगले पांच वर्षों में करीब 1.3 ट्रिलियन डॉलर का पूंजीगत खर्च करने की योजना बना रही हैं। Edison Electric Institute के ड्रू मैलोनी का कहना है कि ग्रिड को हर साल निरंतर निवेश चाहिए और इसे चुनावी चक्र के हिसाब से नहीं चलाया जा सकता।
Fitch ने जून में उत्तरी अमेरिका के यूटिलिटी क्षेत्र का आउटलुक "स्थिर" से घटाकर "नकारात्मक" कर दिया और मध्यावधि चुनाव से जुड़े राजनीतिक दबाव का हवाला दिया। Power Lines के चार्ल्स हुआ के अनुसार, यूटिलिटी नीति में असली बदलाव चुनाव के बाद ही साफ़ होगा।
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