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CCI ने Navi में Prosus के 10 करोड़ डॉलर के निवेश को दी मंजूरी

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने सचिन बंसल की फिनटेक कंपनी Navi में Prosus के 10 करोड़ डॉलर के निवेश को मंजूरी दी है। यह कंपनी का पहला संस्थागत फंडिंग राउंड है।

Navi fintech app on a smartphone beside Prosus branding, symbolizing a $100 million investment in India.
छवि: Inc42 Media

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने सचिन बंसल की अगुवाई वाली फिनटेक कंपनी Navi में Prosus के निवेश को मंजूरी दे दी है। आयोग ने 30 अक्टूबर को यह हरी झंडी दी। इसके तहत Prosus को आईपीओ की तैयारी कर रही कंपनी में अल्पांश हिस्सेदारी मिलेगी।

निवेश की राशि 10 करोड़ डॉलर (955 करोड़ रुपये से अधिक) है। यह Navi का पहला संस्थागत पूंजी जुटाव है। कंपनी के अनुसार सौदा सामान्य क्लोजिंग शर्तों और नियामकीय मंजूरियों के अधीन था, जिनमें CCI की मंजूरी भी शामिल थी। Navi ने न वैल्यूएशन बताया, न Prosus की हिस्सेदारी का आकार, और न ही यह कि नई पूंजी कहां लगाई जाएगी।

CCI ने Navi को ऐसी होल्डिंग कंपनी बताया है जो एक ही मोबाइल ऐप के जरिए वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराती है।

कारोबार का हाल

कंपनी के मुताबिक FY26 में Navi UPI ने डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की और लेन-देन की संख्या के हिसाब से देश का चौथा सबसे बड़ा थर्ड-पार्टी ऐप बना रहा। लेंडिंग इकाई Navi Finserv का AUM 13,000 करोड़ रुपये के पार पहुंचा। कंपनी का कहना है कि चौथी तिमाही में Navi Group consolidated स्तर पर मुनाफे में रहा, हालांकि आंकड़े साझा नहीं किए गए।

Navi Finserv का standalone शुद्ध मुनाफा FY26 में 32% बढ़कर 292.2 करोड़ रुपये रहा, जबकि परिचालन राजस्व 8% बढ़कर 2,461 करोड़ रुपये हुआ। वहीं consolidated शुद्ध मुनाफा 46% घटकर 93.3 करोड़ रुपये रह गया, हालांकि राजस्व 17% बढ़कर 2,691.5 करोड़ रुपये रहा।

आईपीओ की वापसी

बंसल ने कहा कि Naspers और Prosus समूह से उनका जुड़ाव एक दशक से पुराना है। Prosus India के निवेश और M&A प्रमुख आशुतोष शर्मा ने बड़े यूज़र बेस, कई कारोबारी लाइनों और टेक्नोलॉजी-फर्स्ट रवैये को निवेश की वजह बताया।

खबरों के मुताबिक Navi दिसंबर तक SEBI के पास ड्राफ्ट पेपर दोबारा दाखिल कर सकती है और करीब 3,000 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू लाने की तैयारी में है। इसके लिए JM Financial, Kotak Mahindra Capital, Goldman Sachs और JPMorgan को सलाहकार बनाया गया है। कंपनी ने 2022 में 3,350 करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए दस्तावेज दाखिल किए थे, लेकिन बाजार की प्रतिकूल स्थितियों के कारण योजना टाल दी थी।

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